अस्सी घाट पर लगी प्रदर्शनी,हुनर को मिला मंच

रिपोर्ट :- अनुपम भट्टाचार्य 

 

वाराणसी। वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा के गृह विज्ञान विभाग द्वारा दो दिवसीय अस्सी घाट पर ‘हुनर – सीखें, बनाएं और आत्मनिर्भर बनें’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

 

आयोजन में पूर्णमयी एजुकेशनल ट्रस्ट, कुरसातो (जंसा) तथा सुनयना संस्था , जीवाधिपुर (चंदौली) से जुड़ी किशोरों और बच्चों ने दीपावली के अवसर पर तैयार किए गए हस्तनिर्मित सजावटी एवं उपयोगी उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई और उनकी बिक्री की।

 

सुनयना संस्था की समन्वयक प्रो. सुधा पांडेय, सेवानिवृत्त प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ने बताया कि गुड़िया, सविता, संगीता, हसीना, मनीती, रिया, नेहा, मोनी, वंदना, रीता, अंजलि, सुषमा एवं सुमन ने सुषमा एवं समृद्धि के निर्देशन में उत्पाद तैयार किए।

 

पूर्णमयी एजुकेशनल ट्रस्ट के समन्वयक प्रियंका मिश्रा एवं अजितेश श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में समन्वयक लवली, सोनपरी, लकी, हिमांशु, श्रेया, साक्षी, बबली, ज्ञांति, शिवम एवं आरोही ने अपने उत्पादों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया।

 

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण आर्यन इंटरनेशनल स्कूल की कक्षा छह की छात्रा आराध्या तिवारी रही, जिसने क्रोशिया से निर्मित आकर्षक वस्तुओं का प्रदर्शन किया।

 

कार्यक्रम का क्रियान्वयन गृह विज्ञान विभाग वीकेएम की पीजी अंतिम वर्ष की छात्राओं रोमी, रोशनी एवं श्वेता ने उद्यमिता प्रबंधन के प्रायोगिक पाठ्यक्रम के अंतर्गत किया।

 

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. आशा यादव ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में उपयोगी प्रयास बताया।

 

महाविद्यालय की प्रबंधिका श्रीमती उमा भट्टाचार्या ने गृह विज्ञान विभाग के इस प्रयास को विद्यार्थियों में उद्यमशीलता, सामाजिक संवेदनशीलता और व्यावहारिक कौशल विकसित करने की दिशा में एक सार्थक पहल बताया।

 

इस बार पाठ्यक्रम को नया स्वरूप देने की रूपरेखा पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. अंशु शुक्ला एवं विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता देवड़िया ने तैयार की। आयोजन में शोधार्थी शालिनी प्रिया एवं संयोगीता सिंह ने सहयोग किया।

 

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण किशोरों एवं बच्चों के पारंपरिक एवं रचनात्मक कौशल को एक उपयुक्त मंच प्रदान करना तथा उनके द्वारा तैयार उत्पादों को प्रदर्शनी एवं बिक्री के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाना था। इसके साथ ही उन्हें अपने हुनर के आर्थिक महत्व, उत्पाद निर्माण और विपणन की संभावनाओं से परिचित कराना भी इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष रहा। गृह विज्ञान विभाग का प्रयास था कि स्नातकोत्तर छात्राएं उद्यमिता प्रबंधन के सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में प्रयोग कर सकें और उत्पाद निर्माण से लेकर मूल्य निर्धारण, प्रदर्शन एवं बिक्री तक की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करें। ।

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