वाराणसी।”जब भी सारनाथ की खोज का इतिहास लेखन होगा, वह लेखन बाबू जगत सिंह के जिक्र के बिना अधूरा होगा। सारनाथ के उत्खनन का कार्य बाबू जगत सिंह ने या उनके आदमियों ने जानबूझकर नहीं किया था। जगत बाबू को जब उस उत्खनन के धार्मिक और आर्थिक महत्व की जानकारी हुई तो उन्होंने उत्खनन कार्य तत्काल बंद कर दिया था। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि किसी भी इस स्तूप से प्राप्त सामग्री मात्र से किसी संपूर्ण मोहल्ले का निर्माण संभव नहीं हो सकता। आज आवश्यकता है कि उत्खनन के साथ-साथ पूरा स्थलों की रिपोर्ट का लेखन भी अवश्य किया जाए जिससे आने वाले वक्त में वह दस्तावेज रूप में हमें प्राप्त हो और उसे हम शोध के कार्यों में सहायता प्राप्त कर सके। यह बात अशोक मिशन एजुकेशनल सोसायटी द्वारा आयोजित एकल व्याख्यान बनारस के विस्मृत नायक बाबू जगत सिंह: पुनर्मूल्यांकन के अंतर्गत डॉ. सुभाष चंद्र यादव, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ने शनिवार को बाबू जगत सिंह कोठी, जगतगंज में कहीं।

प्रोफेसर ध्रुव कुमार, इतिहास विभाग काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने कहा – बाबू जगत सिंह के ऊपर किए गए शोध कार्य से और प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि वह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। हमें एक भारतीय संग्रहालय की स्थापना करना चाहिए और इन कीमती दस्तावेजों को वहां संभाल कर रखना चाहिए। अतिथियों का स्वागत अशोक आनंद एवं प्रदीप नारायण सिंह, संचालन डॉ. मेजर अरविंद कुमार सिंह और धन्यवाद ज्ञापन प्रो राणा पी.वी सिंह ने किया।

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