वाराणसी। श्री सर्वेश्वरी समूह, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम पड़ाव में अघोरेश्वर भगवान राम जी का “अनन्य दिवस पर्व” बाबा गुरुपद संभव राम के निर्देशन में बड़ी ही श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर सुभह एक प्रभातफेरी निकाली गयी जो पड़ाव आश्रम से अघोरेश्वर महाविभूति स्थल तक गयी। सफाई एवं श्रमदान के पश्चात् लगभग 9:30 बजे परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु की चरणपादुका एवं आसन पर माल्यार्पण, पूजन एवं आरती किया गया। तदोपरांत श्री पृथ्वीपाल ने सफलयोनि का पाठ किया। सभी श्रद्धालुगण दर्शन-पूजन करके प्रसाद ग्रहण किये। लगभग 12 बजे एक पारिवारिक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। वक्ताओं में महात्मा गाँधी हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति केरल प्रान्त के निवासी डॉ जी. गोपीनाथ और उनकी धर्मपत्नी प्रोफेसर केएम मालती, श्री सर्वेश्वरी समूह के उपाध्यक्ष डॉ ब्रजभूषण सिंह, अघोर शोध संस्थान के निदेशक डॉ अशोक कुमार,एसकेबी सिंह, डॉ.बामदेव पाण्डेय, पृथ्वीपाल ने अपने विचार व्यक्त किये। सभी वक्ताओं ने अघोरेश्वर महाप्रभु के विचारों पर चलकर अपने पीड़ित-उपेक्षित की सेवा करने और अन्न-जल के दुरुपयोग को रोकने की प्रेरणा दी। ओमप्रकाश तिवारी ने मंगलाचरण किया और गिरजा तिवारी ने एक भजन प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन श्री सर्वेश्वरी समूह के प्रचार मंत्री पारसनाथ यादव ने किया और संचालन उपध्यक्ष सुरेश सिंह ने किया।

इस पर्व को मनाने के पीछे की कथा है कि “आज ही के दिन माघ कृष्ण चतुर्दशी को सन् 1954 में प्रयागराज में आयोजित कुम्भ मेले में अपने तप के दौरान उपेक्षित और बहुत दिनों के भूखे परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु को एक अज्ञात बूढी माँ ने अपने फांकते हुए अन्न में से एक मुट्ठी अन्न दिया था, जिसके बाद से ही उनको इतना अन्न और वस्त्र मिलने लगा कि वो दूसरों की तरफ टारने लगे I” उल्लेखनीय है कि इसके बाद से ही माँ-भगवती से प्राप्त आशीर्वाद रुपी प्रसाद लेकर अघोरेश्वर महाप्रभु पीड़ित-उपेक्षित मानव की सेवा करने निकल पड़े I

यह कार्यक्रम हर वर्ष वृहद् रूप से प्रयागराज में पूज्यपाद बाबा गुरुपद संभव रामजी के सान्निध्य में श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा प्रयाग द्वारा मनाया जाता हैI इसके अतिरिक्त देश भर में फैली समूह की सभी शाखाओं में भी यह पर्व श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में मनाया जाता हैI

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *