वाराणसी। प्रख्यात आलोचक डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी को वर्ष 2024 के ‘प्रो. शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। ‘कबीर विवेक परिवार’ द्वारा प्रति वर्ष आलोचक प्रो.शुकदेव सिंह की स्मृति में यह पुरस्कार आदिकाल और मध्यकाल के समर्थ आलोचकों और अध्येताओं को प्रदान किया जाता है। न्यास की प्रधान न्यासी श्रीमती भगवंती सिंह ने बताया कि डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी को यह सम्मान अर्पित करते हुए अत्यंत प्रसन्नता अनुभव हो रही है। वे हमारे समय के अत्यंत जरूरी आलोचक हैं। विश्वनाथ जी को दिल्ली में एक सादे समारोह में सम्मान अर्पित किया जाएगा। सम्मान के निर्णायक – मंडल के सदस्यों वरिष्ठ कवि अरुण कमल, वरिष्ठ आलोचक माधव हाड़ा और कवि – आलोचक आशीष त्रिपाठी ने एकमत से विश्वनाथ त्रिपाठी के नाम की अनुशंसा करते हुए कहा ‘डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी की आलोचना परंपरा और आधुनिकता की स्वाभाविकता को आलोकित करती है। उनकी आलोचना के परिसर का निर्माण आदिकाल से समकालीन साहित्य तक परंपरा के मूल्यांकन से निर्मित है। उन्होंने आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामविलास शर्मा, प्रो. नामवर सिंह की उज्ज्वल और प्रगतिशील आलोचना का विस्तार किया है। डॉ. त्रिपाठी की आलोचना का प्रस्थान संदेश रासक के बहाने आदिकाल से होता है। उन्होंने प्रगतिशील दृष्टि से तुलसीदास और मीरा की आलोचना में महत्वपूर्ण कार्य किया है। इससे तुलसी और मीरा के पाठ में नए आयाम उद्घाटित हुए हैं। डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने आधुनिक काल में हजारी प्रसाद द्विवेदी, केदारनाथ अग्रवाल, हरिशंकर परसाई, रामविलास शर्मा और नामवर सिंह का विशेष रूप से मूल्यांकन किया है। विश्वनाथ त्रिपाठी के बगैर समकालीन कहानी आलोचना का कोई भी परिवृत्त अधूरा ही रहेगा। प्रो.शुकदेव सिंह हिन्दी के, विशेषतः भक्ति काल केंद्रित संत साहित्य की आलोचना के महत्वपूर्ण आलोचक हैं। उन्होंने गोरखनाथ, कबीर, रैदास, कीनाराम आदि संतो के साहित्य पर न सिर्फ प्रामाणिक आलोचना लिखी बल्कि उन्हें साहित्य आलोचना का स्थाई बनाने के लिए देश – विदेश में अनेक व्याख्यान भी दिए। मध्यकाल के साथ – साथ प्रो. शुकदेव सिंह ने समकालीन साहित्य पर विशेषतः धूमिल और भुवनेश्वर केंद्रित उल्लेखनीय आलोचना की। वे बीएचयू घराने की पाठ – केंद्रित आलोचना की अनेक परंपराओं में एक प्रमुख धारा के प्रतिनिधि थे।

प्रो. शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान के संयोजक प्रो. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी अत्यंत महत्वपूर्ण और शीर्ष समकालीन आलोचक हैं। उनकी आलोचना आदिकाल से समकाल तक विस्तृत है। उन्होंने अद्दहमाण की संदेश रासक पर आलोचनात्मक टीका लिखी और आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के साथ उसका पाठ संपादन किया। उनकी ‘लोकवादी तुलसीदास’ और ‘मीरा का काव्य’ शीर्षक आलोचना पुस्तकें हैं, जिनसे संवाद किए बगैर भक्ति आंदोलन केंद्रित कोई भी आलोचना पूर्ण न होगी। ‘हिन्दी आलोचना’, ‘प्रारंभिक अवधी’, ‘हिन्दी साहित्य का सरल इतिहास’, ‘कुछ कहानियां : कुछ विचार’, ‘आलोचक का सामाजिक दायित्व’ उनकी अन्य आलोचना पुस्तकें हैं। प्रो. मनोज कुमार सिंह ने आगे कहा कि डॉ.विश्वनाथ त्रिपाठी दिल्ली विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हैं। उनके लिखे में बनारस की रचनात्मक उपस्थिति है। शीघ्र ही दिल्ली में आयोजन कर उन्हें प्रो. शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान अर्पित किया जाएगा।

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