रिपोर्ट उपेन्द्र कुमार पांडेय, आजमगढ़ 

 

 

आजमगढ़।आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 21 जुलाई2024 रविवार को मनाई जाएगी. *नारायण ज्योतिष परामर्श एवं अनुसंधान केंद्र फूलपुर प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पं ऋषिकेश शुक्ल ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के आशीर्वाद से धन संपत्ति, सुख शांति और वैभव का वरदान पाया जा सकता है. इस दिन वेदव्यास का जन्म हुआ था इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है

हिन्‍दू सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्‍व बताया गया है. माना जाता है कि गुरु का स्थान सर्वश्रेष्‍ठ होता है. गुरु भगवान से भी ऊपर होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि वो गुरु ही होता है जो व्यक्ति को अज्ञानता के अंधकार से उबारकर सही रास्ता दिखाता है. इस बार गुरु पूर्णिमा के दिन विशेष योग बन रहे हैं.

गुरु पूर्णिमा प्रारंभ- 20 जुलाई,2024 को शामं 05 बजकर 54 से

गुरु पूर्णिमा समापन – 21 जुलाई,2024दिन रविवार शामं 04 बजकर 53 मिनट तक है

गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ- सफाई करें. इसके बाद गंगा स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें. इसके बाद साफ जगह पर गुरु व्यास की अथवा अपने पूज्य गुरुदेव की प्रतिमा को स्थापित करें. उन्हें चंदन, फूल और प्रसाद अर्पित करें. पूजा करते समय ‘गुरुपंरपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये’ मंत्र का जाप करें. व्यास जी के चित्र को सुगन्धित फूल या माला चढ़ाकर अपने गुरु के पास जाएं. गुरू को वस्त्र, फल-फूल और माला अर्पण कर कुछ दक्षिणा यथा सामर्थ्य धन के रूप में भेंट करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।

पौराणिक काल के महान व्यक्तित्व, ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अट्ठारह पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था. इस दिन केवल गुरु की ही नहीं बल्कि परिवार में जो भी आपसे बड़ा है उसे भी गुरु तुल्य समझना चाहिए. आज के दिन गुरु के आशीर्वाद से जीवन का कल्याण और मंगल होता है. गुरु से मन्त्र प्राप्त करने के लिए भी यह दिन श्रेष्ठ है.

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