वाराणसी।भूजल संरक्षण सप्ताह के अन्तर्गत सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम का आज समापन हुआ। पाणिनि भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने जल को सृष्टि का मूल कारण बताया। उन्होंने जल के महत्त्व को आत्मसात करने की विशिष्ट विधियों का प्रतिपादन भी किया। उन्होंने वैदिक काल से लेकर उपनिषद् काल तथा पौराणिक काल में क्रमशः जल संरक्षक एवं उसके महत्त्व को प्रतिपादित करने वाले आख्यानों का वर्णन किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो सुधाकर मिश्र ने जल संरक्षण के संबंध में चर्चा करते हुये ब्रह्म के समकक्ष रखा तथा उन्होंने जल के ब्रह्मद्रव कहा क्यों कि जल ब्रह्म निसृत हुआ है।

पञ्चतत्त्वों में जल की प्रधानता का प्रतिपादन किया।पानी का सम्मान करने से मानव का सम्मान होता है। प्रलय काल मे पृथ्वी

जलमग्न हो जाती है। जल के दुरुपयोग से पृथ्वी धंस जाती हैं। संयोजक प्रो राघवेन्द्र जी दुबे ने ने भूजल संरक्षण के लिए प्रत्येक घर में जलाशय निर्माण करने का अनुरोध किया। जल संरक्षण के द्वारा वृक्षों की भूमिका को समझाया वृक्ष की जड़े भूमिगत जल को परिष्कृत करती हैं। वृक्ष वषों को आकर्षित करती है।

अतः जल संरक्षण हेतु वृक्ष को संरक्षण करने हैं।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ – राजकुमार मिश्र, डॉ निगमेश्वर पाण्डेय, बुद्धिलाल यादव, प्रीति द्विवेदी, अजय कन्नौजिया तथा अनेक राष्ट्रीय सेवा योजना के सभी छात्र, छात्राए उपस्थित रहे।

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