
प्रेमचन्द की कहानियों का शताब्दी वर्ष विषयक राष्ट्रीय वेबिनार
वाराणसी। मुंशी प्रेमचन्द मार्गदर्शन केन्द्र लमही की ओर से सोमवार को प्रेमचन्द की कहानियों का शताब्दी वर्ष विषयक राष्ट्रीय वेबिनार प्रेमचन्द की 144वीं जयंती के अवसर पर किया गया। अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार डॉ रामसुधार सिंह ने कहा कि मुंशी प्रेमचन्द मन की चेतना के रचनाकार हैं। साम्प्रदायिकता, छुआछूत, स्त्री शोषण, महाजनी सभ्यता रूपी बाजारवाद आदि समस्याएं आज भी उसी रूप में है जिस रूप में प्रेमचन्द ने अपने समाज के चित्रण में उपस्थित किया है, इसीलिए प्रेमचंद आज भी प्रासंगिक है। विशिष्ट वक्ता डॉ मुक्ता ने उत्तर आधुनिकता से जोड़कर शतरंज के खिलाडी की व्याख्या की। डॉ.अलका तिवारी ने पुर्नजागरण से कहानियों को जोड़ते हुए कहा कि मुक्तिमार्ग जैसी कहानी से गोदान उपन्यास का बीज निकलकर आता है। डॉ उषा रानी राव ने कहा कि भारतीय समाज को मेरुदण्ड कृषक की पीड़ा का महाख्यान प्रस्तुत किया। अन्य वक्ता डॉ सुप्रिया, डॉ. ओम प्रकाश और श्रीजा प्रमोद ने अपना वक्तव्य प्रेमचंद की कहानियों के शताब्दी वर्ष की उपलब्धि पर दिया। कंचन सिंह परिहार, पंकज श्रीवास्तव, प्रो. मधु सिंह सहित 153 लोगों ने प्रतिभाग किया। संचालन शुभा श्रीवास्तव, धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के निदेशक राजीव गोड ने किया ।
