वाराणसी। सरस्वती के वरदपुत्र के रूप में पूरे संसार में प्रसिद्ध अद्वितीय विद्वान् पद्मभूषण पण्डितराज श्री राजेश्वर शास्त्री द्राविड़ जी की ज्येष्ठपुत्री, प्रसिद्ध वैदिक विद्वान् वेदमूर्ति स्वर्गीय श्री रामचन्द्र घनपाठी जी की धर्मपत्नी, वर्तमान मे सम्पूर्ण भारतवर्ष में परम्परागत विद्वानों में अग्रणी महामहोपाध्याय श्री मणि द्राविड़ शास्त्री जी की माताजी श्री भवानी जी की पावन स्मृति में शनिवार को हनुमान घाट स्थित श्री कांची कामकोटिश्वर मन्दिर में परमपूज्य यतिवर्य श्री अमृतानन्द सरस्वती स्वामीजी महाराज जी के दिव्य सान्निध्य में चारों वेदों के सभी शाखाओं एवं सभी शास्त्रों के विद्वानों की वेदशास्त्र विद्वत् सभा सम्पन्न हुई ।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में उपस्थित वैदिक विद्वानों ने माताजी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों ने कहा कि

माताजी का जीवन बहुत ही ऐतिहासिक रहा है । बहुत बड़े विद्वान की पुत्री, बहुत बड़े घनपाठी जी की धर्मपत्नी, एवं बहुत ही बड़े विद्वान की माता होने का सौभाग्य आपको प्राप्त है ।आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम समर्पित करते हैं।कार्यक्रम में सभी वेदों के विद्वानों ने वेदघोष किया।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से महामहोपाध्याय पं मणि द्राविड़ ,दिव्य चेतन ब्रह्मचारी, नारायण घनपाठी,सुन्दर राम दीक्षित,राजाराम शुक्ल,बृज भूषण ओझा,काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो नागेन्द्र पांडेय, चंद्रशेखर द्राविड़, आर त्यागराज द्राविड़,रमेश द्राविड़,हरि धायगुडे , गणेश श्रोति,जगदीश शंकर दीक्षित , सौ अपर्णा ,श्रीधर द्राविड़,वरदराज द्राविड़,दुर्गा द्राविड़ सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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