
वाराणसी।तीनों लोकों से न्यारी भगवान शंकर द्वारा बसाई काशी की महिमा जितनी भी गाई जाए कम है। वेद उपनिषद में काशी का वर्णन ऋषि मुनियों ने खूब किया है। काशी में 33 कोटी देवी- देवता विराजमान होकर भक्तों का कल्याण करते हैं। एक तरफ भगवान शंकर जहां लोगों को जीवन मरण से मुक्ति दिलाते हैं वहीं इस काशी में सृष्टि चलाने के लिए वंश वृद्धि की भी मनोकामना पूरी होती है । 
काशी के केदार खंड में भदैनी क्षेत्र में स्थित लोलार्क कुंड में स्नान कर लोलार्केश्वर महादेव का दर्शन पूजन करने से संतान की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषी गणना के अनुसार भादो माह के शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि को जिसे सूर्य षष्ठी के भी नाम से भी जाना जाता है।
पति-पत्नी लोलार्क कुंड में स्नान करें तो उनको संतान की प्राप्ति अवश्य होती है।
भादो माह के शुक्ल पक्ष के षष्ठी के दिन ज्योतिष गणना के अनुसार लोलार्क कुंड में भगवान सूर्य अपनी सभी कलाओं से युक्त किरण प्रकाश कुंड में भेजते हैं। और कुंड पानी ऊर्जायुक्त हो जाता है और जो कुण्ड में स्नान करता है,उसे संतान की प्राप्ति होती है। 
रामयश मिश्र ने कहा कि महाभारत काल में ऐसा ही वर्णन है कि कुंती को भगवान सूर्य के द्वारा ही पांच पांडव जैसे पुत्रो की प्राप्ति हुई थी । भादो माह के शुक्ला शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि दिन 9 सितंबर को है इसलिए हजारों लोग कुंड में स्नान करके मौसमी फलों एवं सब्जियों खासकर को कोहडा, लौकी का दान कर कुंड में छोड़ते हैं।
