डॉ.घनश्याम सिंह कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में हिंदी: कल आज और कल विषयक परिचर्चा 

 

वाराणसी। डॉ. घनश्याम सिंह कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन, गोसाईपूर (मोहाव) में शनिवार को हिंदी विभाग ने “हिंदी – कल आज और कल” विषय पर एक दिवसीय परिचर्चा का सफल आयोजन किया। इस आयोजन की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण पाण्डेय ने की। मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ सुनील कुमार मिश्र ने दीप प्रज्वलन कर शुभू किया। स्वागत करते हुए डॉ प्रवीण पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी आज के वैश्विक युग के बदलते हुए परिवेश में आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाये हुए है। प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार मिश्र ने कहा कि हिंदी न केवल एक भाषा है, बल्कि यह हमारी हिंदी देश की सांस्कृतिक एवं सामाजिक एकता की प्रतीक और पहचान का आधार भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है और इसे नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए हमें और अधिक प्रयास करने होंगे। इस परिचर्चा में राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.संजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि हिंदी न केवल हमारी राष्ट्रीय भाषा है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी और विविधतापूर्ण देश में हिंदी भाषा का योगदान न केवल संचार के माध्यम से, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों को एक सूत्र में बांधने के रूप में महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी के प्रचार-प्रसार से न केवल सामाजिक समरसता बढ़ेगी, बल्कि यह आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर भी देश को सशक्त बनाएगी। कार्यक्रम के दौरान आरती प्रजापति और काजल यादव ने भी विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने हिंदी भाषा के ऐतिहासिक महत्व, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदी न केवल एक भाषा है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और पहचान का प्रतीक भी है। परिचर्चा में महाविद्यालय के अन्य शिक्षकगण, जिनमें श्री रेवाशंकर सिंह, डॉ बिंदु सिंह, जॉन अगस्तीन, अनुराग त्रिपाठी डॉ सुनील कुमार सिंह आदि थे।

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