वाराणसी। विश्व वैदिक सनातन न्यास के तत्वावधान में सिद्धनाथ सिंह की अध्यक्षता में धर्म पथ की ओर कार्यक्रम महमूरगंज स्थित श्रृंगेरी मठ के सभागार में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारतीय के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ मुख्य वक्ता साध्वी,व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा सन्तोष सिंह ने किया।

सरस्वती जी एवं प्रो. विनय पाण्डे, डा. राम सुधार सिंह एवं डा. नंदित्ता जी का स्वागत माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र से किया गया।

सभा को सम्बोधित करते हुये साध्वी सरस्वती जी ने प्रमुखता से कहा कि सनातनियों के लिये धर्म क्षेत्र ही धर्म केंद्र है। वक्फ बोर्ड पर प्रहार करते हुये कहा वक्फ बोर्ड द्वारा फर्जी हथकंडों से अर्जित धार्मिक भूमि पर मंदिरों का पुनरुत्थान किया जायेगा। कट्टर नहीं जागृत हिन्दू ही हिंदुत्व की पहचान है। गौ रक्षा व गौ सेवा हम सनातनी हिंदुओं का प्रथम कर्तव्य है, हमें भारतवर्ष में गौहत्या कत्तई बस्दास्त नहीं है। हिंदू सजग संगठित हो कर सनातन को अपमानित नहीं होने देगा और हर मोर्चे पर संघर्ष के लिये तैयार है।

न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष सन्तोष सिंह ने कहा भारतवर्ष के इस्लामिक कलंकों को मिटाने के लिये हम सनातनी कृत संकल्पित हैं और संवैधानिक तरीके से अपने धर्मयुद्ध को घार देंगे। हमारा दुर्भाग्य है हम अपने ही देश में अपने ही धर्मस्थलों के लिए न्यायालय में गुहार लगा रहे हैं।

प्रो. विनय पाण्डेय ने कहा आज सनातन देश में जिस तरह सनातन धर्म का मजाक बनाया जा रहा है यह हमलोग कभी बर्दास्त नहीं करेंगे। तिरुपति बालाजी के प्रसाद में जानवरों की चर्बी का उपयोग निंदनीय ही नहीं जघन्य अपराध है, दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

डा. रामसुधार सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा की दुनियां को वसुधैव कुटुम्बकम का पाठ पढ़ाने वाला राष्ट्र आज कई टुकड़ों में बटा वर्तमान में जो बचा वो भी सेक्युलर हो गया और सनातन आहत है कारण हम सनातनियों के एकजुटता में कमी है।

डा. नंदिता जी ने कहा कि वैदिक शिक्षा ही सनातन का मूल है। देश के गुरुकुलों के नष्ट होने से समाज में नैतिकता हास हुआ है। आज गुरुकुलों की स्थापना एवं वैदिक शिक्षा को प्रमुखता से अपनाना होगा जहाँ नीति, नैतिकता, धर्म एवं विज्ञान की शिक्षा दी जाय। सरकार को भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

संचालन संतोष सिंह ने किया। समारोह में प्रमुखतः न्यास के पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं एवं काशी के प्रबुद्धजन भारी संख्या में मौजूद थे।

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