वाराणसी। रामनगर के शास्त्री घाट के पास पर्यटन विकास के अंतर्गत उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लि0 द्वारा कराये जा रहे कार्य के दौरान एक स्ट्रक्चर के क्षतिग्रस्त होने घटना में एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाने की घटना की जांच जिलाधिकारी एस.राजलिंगम ने अपर जिलाधिकारी (नगर) की अध्यक्षता में अधिकारियों की कमेटी बनाकर कराई। जिसमे अधिशासी अभियन्ता, निर्माण खण्ड-1, लो0नि०वि०, अधिशासी अभियन्ता, सिंचाई बन्धी प्रखण्ड, सहायक अभियन्ता, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के अलावा कार्यदायी संस्था उ0प्र0 प्रोजेक्ट कारपोरेशन लि0 के परियोजना प्रबन्धक एवं उपनिदेशक पर्यटन भी जांच के दौरान मौके पर उपस्थित रहे।

जांच रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट रहा है कि कार्य स्थल पर निर्मित छतरी अकुशल कारीगरी के कारण स्टेबल नहीं थी, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। जाच कमेटी के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि

छत में प्रयुक्त पत्थरो को जोड़ने हेतु प्रयुक्त एडेसिव/फिलर मटेरियल लगाने का कार्य (वर्कमैनशिप) प्रथम

दृष्टया सन्तोषजनक नहीं पाया गया। पत्थरो को जोड़ने हेतु पत्थरों मे ग्रूव उपयुक्त नही पाये गये और पत्थरों को जोड़ने हेतु क्रैंप का प्रयोग भी नहीं पाया गया। कार्य स्थल पर उपस्थित कार्य से सम्बन्धित छतरी के तकनीकी संस्थान से स्वीकृत/वेट किया हुआ ड्राइंग एवं डिजाइन की भाग कार्यदायी संस्था के अधिकारियों से की गयी, परन्तु उनके द्वारा कोई स्वीकृत ड्राइग एवं डिजाइन जांच कमेटी को उपलब्ध नहीं करायी गयी। कार्य स्थल पर इसी प्रकार दो और ऑक्टागोनल छतरी निर्मित है, जिनकी स्टेबिलिटी संशयपूर्ण है जो कि समान प्रतिरूप के है। जिनका उपयोग जनमानस हेतु सुरक्षित प्रतीत नहीं हो रहा है। जांच के दौरान कार्य स्थल पर निर्मित अवशेष स्ट्रक्चर में कमियां भी परिलक्षित हुई। स्पष्ट है कि सम्बन्धित ठेकेदार/फर्म द्वारा उक्त कार्य में खराब सामग्री का प्रयोग किया गया है एवं सम्बन्धित अधिकारी द्वारा समुचित पर्यवेक्षण नहीं किया गया है।

जिलाधिकारी एस.राजलिंगम ने जांच कमेटी की रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्यों के दृष्टिगत रामनगर के शास्त्री घाट निर्माण मे परिलक्षित कमियो एवं घटना हेतु जिम्मेदार संबंधित ठेकेदार/फर्म एवं पर्यवेक्षणीय शिथिलता हेतु सम्बन्धित अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने की संस्तुति प्रमुख सचिव, सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर की है।

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