
संस्कृत भाषा देववाणी है तो, देशवाणी भी है।– महामहिम कुलाधिपति

संस्कृत के ज्ञान के बिना भारत को जानना पूर्ण सम्भव नही है।– मुख्य अतिथि

रिपोर्ट:- वरिष्ठ संवाददाता
वाराणसी।भारत के प्रतिष्ठा के दो स्तम्भ है प्रथम संस्कृत व द्वितीय संस्कृति। संस्कृत भाषा देववाणी है तो, देश वाणी भी है। हर राष्ट्रवादी को संस्कृत पढ़ना चाहिये। उक्त विचार बुधवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में आयोजित 42 वें दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता करते हुए महामहिम कुलाधिपति एवं श्री राज्यपाल श्रीमती आनन्दी बेन पटेल ने व्यक्त किया।
उन्होंने संस्कृत एवं संस्कृति के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि आदर्श जीवन शैली संस्कृत के प्राचीन ग्रंथों में बताया गया है जिसका हिन्दी अनुवाद कर आम जनमानस तक पहुंचाया जाये। जिससे ऋषि मुनियों के प्राचीन ज्ञान से वे भी लाभान्वित हो सकें।
महामहिम कुलाधिपति ने सरस्वती भवन पुस्तकालय में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों के बारे बताया कि यह हजार या उससे पूर्व की पांडुलिपियों को संरक्षित किया गया है।जिसमें अनमोल ज्ञान राशि निहित हैं, उसके संरक्षण का कार्य भी भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के द्वारा बहुत सुन्दर प्रयास के साथ किया जा रहा है, जिसको गति देने के लिए कंप्यूटर क्रय करने का भी निर्देश दिया गया है।पांडुलिपियों का प्रकाशन कराकर व्यापक प्रचार प्रसार भी किया जाना चाहिए।
कुलाधिपति महोदया ने बच्चों को भारत का भविष्य बताते हुए कहा कहा कि आठ साल तक के बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहिये जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।उनकी स्मृतियां उस समय तीव्र होती हैं।वहीं भावी पीढ़ी के भविष्य हैं।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम एवं राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद के अध्यक्ष प्रो अनिल डी सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि संस्कृत मात्र एक भाषा ही नहीं अपितु भारत के एक गौरवपूर्ण इतिहास को समेटने वाली अमूल्य नीधि है जो समस्त भारतीयों के लिये उर्जा का स्रोत है। संस्कृत के ज्ञान के बिना भारत को जानना पूर्ण सम्भव नही है। उन्होंने विश्वविद्यालय के ऐतिहासिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय में प्रारम्भ काल से ही देश विदेश के छात्र अध्ययन एवं अनुसंधान के लिये आते रहे है आज भी दर्जनों विदेशी छात्र शोध कर रहे हैं।
समारोह के विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षामंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय ने मेडल प्राप्त छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि मेडल प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को समाज का माडल बनना होगा तभी सही रूप में उनके द्वारा अर्जित ज्ञान का उपयोग हो सकेंगा।
समारोह की सारस्वत अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने काशी नगरी के महिमा का बखान करते हुए कहा कि काशी पाप विनाशी, विद्या प्रकाशी, चीर विलासी, काशी सबकी तारणीय भूमि हैं। यहां जो कोई भी आया यही का हो गया। उन्होंने विश्वविद्यालय के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा से सम्बद्ध अनेक कार्य चल रहे है। कलाओं का सांस्कृतिक परम्पराओं का पूर्ण रूप से सम्वर्धन, संरक्षण गतिमान है।
कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा के द्वारा मंच पर आसीन अतिथियों का एकल पुष्प,अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत और अभिनंदन किया।
इस अवसर पर मा कुलाधिपति महोदया द्वारा विशिष्ट अतिथि गृह का शिलान्यास किया गया है, इस अतिथि गृह के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा अनुदान प्राप्त है।
डिजी लॉकर के माध्यम से कुलाधिपति महोदया के समक्ष उपाधियों का प्रदर्शन किया गया। डिजी लॉकर में सभी 13733 (मध्यमा से लेकर आचार्य, विद्या वारिधि) उपाधियों को ऑनलाइन अपलोड किया गया है, अब घर बैठे अपने समस्त अंक पत्र एवं प्रमाण पत्र ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त कर सकते हैं।
महामहिम कुलाधिपति के द्वारा 31 मेधावियों को विभिन्न प्रकार 56 मेडल (पदक) देकर सम्मानित किया गया।
महामहिम कुलाधिपति के हाथों से पदक प्राप्त कर
मेधावियों (छात्र- छात्राओं) में अतिउत्साहित होकर हर्षित हुए। महामहिम कुलाधिपति के द्वारा विश्वविद्यालय के द्वारा गोद लिए गए पांच गांवों के विद्यालयों में विभिन्न तरह के प्रतियोगिताओं क्रमशः निबन्ध, चित्र कला, कहानी लेखन एवं कथा वाचन में विजेताओं को क्रमशः
जिसमें मोनू राजभर,समीर, निष्ठा सेठ, नीरज गौतम, श्रेया शुक्ला, तीर्थ गौतम, श्रेयांस,आकांक्षा एवं अराधना आदि को पुरस्कृत किया गया।इसके साथ ही पांच गांवों के प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य को भी कुलाधिपति द्वारा सारस्वत उपहार एवं स्मृति चिन्ह भी दिया गया।
विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय के अनुरोध पर महामहिम कुलाधिपति महोदया के द्वारा चंदौली जनपद के जिलाधिकारी एवं राजभवन के सहयोग से आंगन वाणी कार्य कत्रियो को साड़ी, किट्स आदि का वितरण भी किया गया।महामहिम द्वारा किट में खिलौने, स्कूल बैग, तौलिया, नेल कटर आदि वितरित किया गया।
कुलाधिपति एवं श्री राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल का दौरान कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने एकल पुष्प,अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह देकर स्वागत और अभिनंदन किया।
मुख्य अतिथि ने 42 वें दीक्षान्त समारोह में 13733 उपाधियां एवं 31 मेधावी को 56 पदक
विश्वविद्यालय के 42वें दीक्षान्त समारोह में कुल 31 मेधावियों को 56 पदक मा० कुलाधिपति महोदया के द्वारा प्रदान किया गया। कुलसचिव राकेश कुमार के द्वारा उपाधिधारक छात्र छात्रओं का उपस्थापन किया गया। दीक्षान्त समारोह में 13733 उपाधियां प्रदान की गयी। कार्यकम का प्रारम्भ पौराणिक एवं वैदिक मंगलाचरण से किया गया।
धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने सभी सम्मानित उपस्थित जनों का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।संचालन डॉ० मधुसूदन मिश्र ने किया।
इस अवसर आयुष राज्यमंत्री श्री दया शंकर मिश्र “दयालू”,मेयर अशोक कुमार तिवारी, विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, पूर्व कुलपति प्रो पृथ्वीश नाग,विधायक रमेश जायसवाल,जिलाधिकारी चंदौली निखिल टीफ़ू ,मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव,प्रो प्रेमनारायण सिंह, प्रो रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो हरिशंकर पाण्डेय, प्रो जितेन्द्र कुमार, प्रो सुधाकर मिश्र, प्रो रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो दिनेश कुमार गर्ग, प्रो अमित कुमार शुक्ल, प्रो• विजय कुमार पाण्डेय,प्रो फूलचन्द्र जैन प्रेमी, प्रो० दुर्गानन्दन प्रसाद तिवारी, विद्या एवं कार्य परिषद् के सम्मानित सदस्य सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी सहित छात्र एवं छात्रायें उपस्थित थे।
