
वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के 42 वें दीक्षान्त समारोह में सहभाग करने के पश्चात् बतौर मुख्य अतिथि अतिथि राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम एवं राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद के अध्यक्ष प्रो अनिल डी सहस्त्र बुद्धे, शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय एवं शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने विश्वविद्यालय प्रसिद्ध सरस्वती भवन पुस्तकालय के अंदर संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन कर भाव विभोर मुद्रा में अपने भाव प्रकट किया।
मुख्य अतिथि नैक के चेयरमैन प्रो अनिल डी• सहस्त्रबुद्धे ने विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक सरस्वती भवन में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों में “रास पंचाध्यायी”, भागवतगीता एवं दुर्गासप्तशती (विशेष कपड़े में लिखी गई) जो कि स्वर्ण अक्षरों एवं स्वर्ण कलाओं से युक्त है, देखकर भाव विभोर हुए।
उन्होंने भारतीय संस्कृति के धरोहर को संरक्षित करने के अभियान को निरन्तर जारी रखने तथा विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे इस प्रयास की सराहना भी की।
शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों को देखकर कहा कि यह अमूल्य धरोहर है, इसके अंदर निहित अमृत ज्ञान को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जाना चाहिए, इससे सभी लोग लाभान्वित होंगे।
उस दौरान शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि यह अद्भुत और अलौकिक अमृत ज्ञान भंडार है।
विस्तार भवन में भारत सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के द्वारा पांडुलिपियों के संरक्षण के कार्यों का भी अवलोकन किया।
उस दौरान कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा, कुलसचिव राकेश कुमार, प्रो राजनाथ आदि उपस्थित थे।
