वरिष्ठ कवि डा ब्रजेश नारायण व्दिवेदी
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आज हमारे साथ में है
कल भी साथ निभाएगा।
इतना मन विश्वास है रखता
मित्र आ हाथ मिलाएगा।।
यह तो मंत्र है ,इस जीवन का
कैसे इसे भुलाएं हम ।
प्यार सभी का मिलता मुझको,
यह कैसे झुठलाएंं हम।।
अभी-अभी कल साथ में मेरे,
मित्र बैठ कर बात किया ।
एक साथ हम दोनों ने ही,
प्रेम से बीते समय जिए।।
जितना सुख इस मन ने पाया
कैसे उसे बताएँ हम।।
प्यार सभी का मिलता मुझको, यह कैसे झुठलाएँ हम।।
बरसों पहले जिन गलियों में आना जाना होता था,
बीच बैठकर मित्रों के ही,
दर्द बटाना होता था,
कल फिर से संजीवनी पाया,
कैसे तुम्हें दिखाएँ हम।।
बीती यादें,बीती बातें ,
साथ-साथ दोहराए हम,
भूले बिसरे उन गीतों को एक बार फिर गाए हम,
आओ साथ बैठ लो मेरे,
नूतन उन्हें बनाएँ हम।।
कल उस घर में दीप जले थे,
वहां आज उजियारा है।
जगेँ जगाएँ सारे जग को,
यही हमारा नारा है ।
करने अपनी खुशियां पाईं,
सब में इसे लुटाएँ हम।।
प्यार सभी का मिलता मुझको यह कैसे झुठलाएँ हम।।
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डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी
सत्यम नगर, भगवान पुर, वाराणसी 221005
9450186712
