
वाराणसी।छठ महापर्व, जो सूर्य की अराधना का पर्व है, प्रकृति से युक्त एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस पर्व में सूर्यास्त और सूर्योदय का विशेष महत्व है।उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय,वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने आज छठ महापर्व के महत्व और उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए व्यक्त किया।
कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि
सूर्यास्त के समय सूर्य की अराधना करने से मनुष्य को आत्मशांति और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह समय प्राकृतिक रूप से सबसे शांत और सौम्य होता है, जब सूर्य की किरणें हमारे जीवन में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करती हैं।
सूर्योदय के समय सूर्य की अराधना करने से मनुष्य को नई ऊर्जा और जीवन की दिशा मिलती है। यह समय प्राकृतिक रूप से सबसे पवित्र और शुभ होता है, जब सूर्य की किरणें हमारे जीवन में नई आशा और उत्साह का संचार करती हैं।
कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि “छठ महापर्व हमें प्रकृति के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। सूर्य की अराधना करने से हम अपने जीवन में नई ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त करते हैं। यह पर्व हमें अपने जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने की प्रेरणा देता है।
छठ महापर्व सूर्य की अराधना का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो प्रकृति से युक्त है। सूर्यास्त और सूर्योदय का महत्व इस पर्व में विशेष है। हमें यह समझने में मदद मिलती है कि यह पर्व हमें प्रकृति के साथ जुड़ने और अपने जीवन को संतुलित बनाने की प्रेरणा देता है।
