शारीरिक प्रक्रियाओं का पाचन और अवशोषण पर पडने वाले प्रभावों पर चर्चा

 

वाराणसी। मनोवैज्ञानिक और जीवन शैली विशेषज्ञ डा अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि केवल पौष्टिक भोजन खा लेना ही पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है ‌‌, इसके बाद शरीर को उसे पचाने और अवशोषित करने की भी सही क्षमता होनी चाहिए। यह बातें मोतीलाल मानव उत्थान समिति द्वारा आयोजित बनारस पुस्तक मेले के तीसरे दिन विशिष्ट व्याख्यान कही। उन्होंने आधुनिक जीवन शैली किस तरह से हमारी इन तीनों क्षमताओं में कमी कर रही है, इस पर विस्तार से दिया और इसमें सुधार के उपाय भी बताये। उन्होंने ” माइंड फुल इटिंग ” मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया को भी विस्तार से बताया। विभिन्न विरोधी और पूरक आहारों और उनकी क्रियाविधि को स्पष्ट किया। उदाहरणों के माध्यम से बताया कि कैसे वही दो आहार अलग अलग लेने पर उत्तम और एक साथ लेने पर नुकसानदेह हो जाते हैं। भोजन लेने के पहले और बाद की शारीरिक प्रक्रियाओं का भी पाचन और अवशोषण पर पडने वाले प्रभावों को भी समझाया। संचालन प्रबन्धक मिथिलेश कुशवाहा, धन्यवाद ज्ञापन आनंद प्रकाश सिंह ने दिया।

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