शतरंज प्रतियोगिता में सौरभ गौतम प्रथम

 

वाराणसी।संयोजक एवं वेद विभाग के आचार्य डॉ० सत्येन्द्र कुमार यादव ने खिलाड़ियों को खेल के प्रति प्रेरित करते हुए बताया कि शतरंज खेलना ब्रेन एक्सरसाइज है , इस खेल से फोकस, कॉन्फिडेंस, आईक्यू लेवल बढ़ता है, यह खेल डिप्रेशन से भी बचाता है।शतरंज दुनिया में खेले जाने वाले सबसे पुराने और सबसे लोकप्रिय इंडोर खेलों में से एक है। इसे दिमागी खेल माना जाता है। खेल की हर एक चाल में दिमाग के सभी हिस्सों की भागीदारी होती है। इस गेम से सीखने की क्षमता भी तेजी से डेवलप होती है।शोधकर्ताओं ने 70 साल से ज्यादा के 10318 ऑस्ट्रेलियन लोगों पर शोध किया जिनमें उन्होंने पाया कि मेंटल एक्टिविटीज जैसे जर्नल बनाना, एजुकेशन क्लास लेना, क्रॉसवर्ड और शतरंज जैसे खेल खेलने वाले लोगों में 9 से 11 फीसदी तक डिमेंशिया होने का खतरा कम हो सकता है। कंप्यूटर पर शतरंज या फिर क्रॉसवर्ड खेलने से भी इस बीमारी के कम होने की संभावनाएं बढ़ती है। इसलिए ब्रेन को एक्टिव रखना जरूरी है।शतरंज एक ऐसा खेल है, जिसे बच्चे-बड़े सभी खेलना पसंद करते हैं। शतरंज से व्यक्ति ज्यादा क्रिएटिव बनता है। दिमागी कसरत के लिए शतरंज एक शानदार गेम है। शतरंज खेलने से मेमोरी बूस्ट होती है। इससे डिप्रेशन और चिंता का खतरा भी कम होता है।

शतरंज प्रतियोगिता में सौरभ गौतम प्रथम, किशन मिश्रा द्वितीय और अश्वनी पांडेय तृतीय स्थान पर रहे।

व्याकरण विभाग के आचार्य डॉ0 नितिन कुमार आर्य एवं धनुर्विद्या प्रशिक्षक आदित्य कुमार निर्णायक रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *