वाराणसी।‌ प्रेमचंद साहित्य में कला के सीमित प्रयोग के समर्थक थे। वे कला को वहीं तक स्वीकार करते थे जहां तक कि वह मनुष्य के लिए उपयोगी हो। यह बातें प्रो. श्रद्धानंद ने प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र (लमही) द्वारा प्रेमचंद स्मारक स्थल पर आयोजित सुनो मैं प्रेमचंद कहानी पाठ 1413 दिवस पूर्ण होने पर कहीं। प्रेमचंद की कहानी कजाकी का पाठ प्रमोद मौर्य ने किया। कार्यक्रम के अंत में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दो मिनट मौन रहकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई । इस अवसर संजय श्रीवास्तव राजीव गोंड, सुरेश दूबे, यश, रोहित गुप्ता, प्रांजल श्रीवास्तव, अजय यादव, संजय श्रीवास्तव, राहुल विश्वकर्मा, राहुल यादव, सुजीत सिंह, आयुषी दूबे, मनोज विश्वकर्मा आदि थे।

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