
आरटीआई में आवेदन के साथ 10 रूपए का नकद धनराशि स्वीकार नहीं होगी
वाराणसी। कमिश्नर कौशल राज शर्मा के निर्देश के क्रम में शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में संयुक्त विकास आयुक्त वाराणसी मण्डल की अध्यक्षता में “उ०प्र० जनहित गारंटी अधिनियम-2011” का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम किया गया। कमिश्नर द्वारा प्रशिक्षण देने हेतु नामित प्रज्ञा सिंह, नोडल अधिकारी/निरीक्षक, राजकीय कार्यालय, उ0प्र0 प्रशासनिक सुधार विभाग वाराणसी मण्डल के साथ शिवकुमार संयुक्त विकास आयुक्त वाराणसी मण्डल, विभिन्न पदाभिहित अधिकारी, प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं संबंधित पटल सहायकों की गरिमायी उपस्थिति में उ०प्र० जनहित गारंटी अधिनियम-2011 के अन्तर्गत सरकार द्वारा जनता को दी जा रही विभिन्न प्रकार के विभागीय सेवाओं के साथ सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 एवं उ0प्र0 सूचना नियमावली- 2015 के अन्तर्गत प्राप्त आवेदनों/आनलाइन व आफलाइन के समुचित क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय कार्यशाला/प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संयुक्त विकास आयुक्त शिवकुमार ने कहा कि उ०प्र० जनहित गारंटी अधिनियम- 2011 एवं सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के तहत आवेदकों द्वारा मांगी गयी
जानकारी एवं आवेदनों का निस्तारण समयान्तर्गत करें। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित डा० राजेश कुमार अपर निदेशक पशुपालन ग्रेड-2 द्वारा बताया गया कि सरकारी प्रतिष्ठानों को जनता के प्रति जवाबदेही बनाने एवं सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिये उ0प्र0 जनहित गारंटी अधिनियम- 2011 के अन्तर्गत सूचना के अधिकार अधिनियम का उछदेश्य यह कि सरकार को जनता के लिये और अधिक जवाबदेह बनाता है। यह अधिनियम नागरिकों को सरकार की गतिविधियों के प्रति जागरूक करने का एक बड़ा कदम है। नोडल अधिकारी/प्रशिक्षक प्रज्ञा सिंह ने बताया कि उ०प्र० जनहित गारंटी अधिनियम-2011 के तहत राज्य के लोगों को निर्धारित समय सीमा के अन्दर सेवाएं देने का प्राविधान है। इस अधिनियम के तहत कई तरह की सेवाएं दी गयी है। नोडल अधिकारी प्रज्ञा सिंह द्वारा यह भी बताया गया कि उक्त अधिनियम के अन्तर्गत विभिन्न विभागों की 411 विभागीय सेवाएं एवं सभी विभागों के अधिष्ठान से सम्बन्धित 10 कामन सेवाएं अधिसूचित की गयी हैं, जिनका सन्धित विभागों/पदाभिहित अधिकारियों द्वारा निर्धारित समय के अन्तर्गत किया जाना है। अधिसूचित सेवाओं को समयबद्ध रूप से आवेदकों को उपलब्ध नहीं कराये जाने पर द्वितीय अपीलीय अधिकारी द्वारा अधिकतम रू 5000 का अर्थ दण्ड अधिरोपित किया जा सकता है जो सम्बन्धित के वेतन से वसूल कर सरकारी कोष में जमा किया जायेगा और सम्बन्धित पदाभिहित अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की जा सकती है। उ0प्र0 जनहित गारंटी अधिनियम- 2011 के अन्तर्गत अधिसूचित सेवाओं के समयबद्ध निस्तारण का अनुश्रवण एवं समीक्षा राज्य स्तर पर मुख्य निरीक्षक प्रयागराज द्वारा तथा मण्डल स्तर पर नामित नोडल अधिकारी/निरीक्षक राजकीय कार्यालय उ०प्र, प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा आयुक्त के निर्देशन में माह में एक बार की जाएगी। इसके साथ ही सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 एवं उ0प्र0 सूचना नियमावली-2015 के अन्तर्गत प्राप्त आवेदनों/आनलाइन व आफलाइन के निस्तारण मे आ रही व्यावहारिक कठिनाईयों के अन्तर्गत निस्तारण हेतु बारिकियां बतायी गयी, जिसमें इस अधिनियम के अन्तर्गत सरकारी विभाग पब्लिक सेक्टर यूनिट, सरकारी सहायता से चल रही गैर सरकारी संस्थाएं, वह शिक्षण संस्थायें भी इसके दायरे में शामिल हैं। पूर्णतः से निजी संस्थाएं इस कानून के दायें में नहीं है लेकिन किसी कानून के तहत कोई सरकारी विभाग किसी निजी संस्थान से कोई जानकारी मांग सकता है। तो उस विभाग के माध्यम से वह सूचना मांगी जा सकती है। नोडल अधिकारी/प्रशिक्षक प्रज्ञा सिंह ने बताया कि जनसूचना अधिकारियों का मूल मंत्र स्वविवक व सकारात्मक होना चाहिये एवं नये शासनादेश दिनांक 18.11.2024 के अनुसार 10 रूपए का नकद धनराशि स्वीकार नहीं होगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पशुपालन विभाग, राजस्व विभाग, सांख्यिकी विभाग मत्सय विभाग सहित मण्डल मुख्यालय के अधिकरियों व कर्मचारियों के साथ प्रसून अग्रवाल ई-डिस्ट्रिक मैनेजर भी उपस्थित रहे।
