भोजपुरी गीतों के उन्नयन के लिए प्रतिबद्ध हैं कवि ई राम नरेश “नरेश”

वाराणसी। शनिवार को चंद्रा साहित्य परिषद ने इन्द्र नगर कालोनी स्थित प्रधान कार्यालय के सभागार में एकल काव्यपाठ व नववर्ष अभिनंदन समारोह मनाया।

चंद्रा साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष वरिष्ठ कवि ई रामनरेश नरेश ने एकल काव्यपाठ प्रस्तुत कर श्रोताओं का मनमोह लिया।

समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार डा कैलाश सिंह विकास ने किया।

चंद्रा साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ई रामनरेश नरेश ने बताया कि लोक संगीत और लोक जन के परंपरा के गीत जहाँ आज के हिंदी सिनेमा के आगे विलुप्त प्राय होते जा रहे हैं, वहीं भोजपुरी सिनेमा की अश्लील भरी धुन,स्वर और सीन से संस्कार विवाह आदि के गीतों का भविष्य अंधेरा सा लग रहा है I

भोजपुरी गीतों को नया मुकाम मिले, अश्लीलता, अभद्रता और फूहड़ता समाप्त हो, इसके लिए सुप्रसिद्ध कवि इंजीनियर राम नरेश नरेश के प्रयास से इनके द्वारा लिखे और गाए इन नये भोजपुरी गीतों से भोजपुरी परिक्षेत्रों के श्रोताओं को संस्कारिक, शादी, विवाह, मड़ये के गीत, हल्दी कार्यक्रम, कन्या दान से लेकर बेटी के विदाई के गीतों में अब उनके मन के गीत जो परिवार, बेटी, बहू, नाती- नतिनी के साथ बैठ कर सुन सकें, लिखने से लेकर कवि गोष्ठियों, कवि सम्मेलनों आकाश वाणी,दूरदर्शन और कवीय चर्चाओं के माध्यम से विधिवत प्रचारित – प्रसारित कर रहे हैं I

कवि नरेश जी एक कुशल अभियंता के साथ बहुत ही अच्छे लेखक, कवि व गीतकार हैं, जिनकी दर्जनों पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं I

भोजपुरी की लिखी इनकी पुस्तकें अमराई, पुरवाई और मड़ये की हरदी आज धूम मचाये हुए हैंI परिछन गीत, विदाई, मटकोड़, समधी को गारी आदि पारंपरिक गीतों की बहुत ही बखूबी से सजाने- संवारनें और भोजपुरी भाषा को मर्यादित शब्द संयोजन से आम जन तक पहुंचाने अतुलनीय प्रयासों के लिए भोजपुरी लोक मानस सदा याद करेगा i

कुल मिलाकर हिंदी कविताओं के साथ- साथ नरेश जी भोजपुरी गीत और कविताओं के उन्नयन के लिए सतत प्रयास कर रहे हैं I भोजपुरी माटी की सुगंध से जिसकी प्रेरणा इनके अपने पैतृक आवास गाँव- नान्हूंपुर थाना- पड़री जिला- मिर्जापुर से मिल रही है,

और नये धुन, मिठास एवं लोकजन ग्राह्यता को नया आयाम दे रहे हैं I

इनके भोजपुरी प्रेम, जुड़ाव तथा गाँव -गिरांव से ढूढ़ कर प्राचीनतम विधा और बुआई ,निराई- गुड़ाई, मड़ाई से लेकर धान के रोपाई तक को आम जन तक लाने के लिए कटिबद्ध हैं I

इनके इन प्रयासों से वाराणसी और आस- पास के जिलों की कई संस्थाएँ सम्मानित करके इनके भोजपुरी गीत और कविता लेखन कला को तेज धार देने में लगी हैंI स्थानीय लोक गायक भी इनके लिखे भोजपुरी गीत आकाश वाणी और दूर दर्शन पर गा रहे हैं I

सहज और सरल स्वभाव के साथ ही व्यक्तित्व के धनी विद्वान कवि नरेश की सोच है की जैसे गाँव के विकास से ही देश की पहचान बनती है ठीक वैसे ही गाँव के माटी से जुड़े भोजपुरी गीत गवनंई से देश की साहत्यिक ,सांस्कृतिक और भाषा को निश्चित ही नई पहचान और वैश्विक ऊँचाई मिलेगी और अपनी भोजपुरी विरासत सहेजी जा सकेगी I

नववर्ष में पत्रकारिता की नई चुनौतियां विषयक परिचर्चा पर वरिष्ठ पत्रकार व इण्डियन एसोसिएशन ऑफ जनर्लिस्ट (आईएजे) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा कैलाश सिंह विकास, राष्ट्रीय महामंत्री मोहम्मद दाऊद, राष्ट्रीय संगठन मंत्री आनंद कुमार सिंह अन्ना, वरिष्ठ पत्रकार विशाल चौरसिया अपने विचार व्यक्त किये, पत्रकारिता में छाया चित्रों से रिपोर्टिंग की सत्यता को छाया कार विनोद राव के अद्भुत सुझाव सराहनीय रहा I

नये वर्ष का स्वागत कवि इंजीनियर राम नरेश “नरेश” के अभिनंदन गीत से हुआ I उन्होंने भोजपुरी गीत के माध्यम से लोकजन में एकता, भाई चारा और प्यार को बढ़ावा देते रहने तथा उन्नयन के लिए प्रतिबद्ध का संकल्प दोहराया I

इस काव्य गोष्ठी और परिचर्चा में डा कैलाश सिंह विकास, मोहम्मद दाऊद,आनंद सिंह अन्ना, विशाल चौरसिया, तथा सुप्रसिद्ध छायाकार विनोद राव उपस्थित रहे I

कवि इंजीनियर राम नरेश “नरेश” ने आभार तथा मोहम्मद दाऊद के धन्यवाद ज्ञापन से गोष्ठी का समापन हुआ I

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