वाराणसी। वेदे सर्वप्रतिष्ठितम् अर्थात् वेद में सभी विषयों का ज्ञान प्रतिष्ठित है शास्त्रीय ध्येय वाक्य को आत्मसात करते एवं कराते हुए काशी की गुरुकुल परम्परा ने पुनः वेद चर्चा का क्रम पुनर्जीवित करते हुए यह विद्यार्थियों के अन्दर प्रतिस्पर्धा के माध्यम से बुद्धि को और तीक्ष्ण बनाने का कार्य किया जा रहा है।

आचार्य गोपाल चन्द्र मिश्र वैदिक उन्नयन संस्थान, श्री पट्टाभिराम शास्त्री वेद मीमांसा अनुसन्धान केन्द्र एवं श्री स्वामी नारायणानन्दतीर्थ वेद विद्यालय के आयोजकत्व में काशी के वैदिक बटुकों ने मंगलवार को अपने मेधा का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए वेद के संहिता को आद्योपांत श्रवण कराते हुए वेद के अत्यंत कठिन पद, घन एवं जटा इत्यादि अष्ट विकृतियों की अद्भुत प्रस्तुति दी।

प्राचीन काल में गुरु और शिष्य के मध्य ज्ञान को परिमार्जित करने हेतु शास्त्रार्थ स्वरूप वाद-विवाद का क्रम निहित होता था। आज़ यह परम्परा बहुत ही कम देखने को मिलती है ऐसे समय में नन्हे-मुन्ने बच्चों के द्वारा अत्यंत कठोर तपस्या को पूरीत करते हुए वैदिक ऋचाओं का मन्त्रभाग को कण्ठगत कर रहे हैं।

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के विभिन्न अप्राप्य शाखाओं की प्रतियोगिता हुई। जिसमें वेद पढ़ने वाले त्रिशताधिक बटुकों ने प्रतिभाग किया। प्रत्येक वेद में योग्य आचार्यों द्वारा परीक्षण किया गया बटुकों कि विलक्षण प्रतिभा को देखकर सभी स्तब्ध रहे। वैदिक वाङ्मय में अपना सर्वस्व न्योछावर किये हुए तथा इस सम्पूर्ण कार्यक्रम के सूत्रधार परम तपस्वी लखन स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज के पावन सान्निध्य में बच्चों को प्रोत्साहित किया गया। पूज्य ब्रह्मचारी जी द्वारा दुर्गादत्त पाण्डेय को 5,100 रुपए के विशिष्ट सम्मान से तथा 5100, प्रथम, 1100 द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को 500 प्रोत्साहन राशि तथा प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भेलूपुर थाना के एस एस आई घनश्याम मिश्र ने भी बच्चों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 1,100 आदि बच्चों को देकर उनकी वेद अभिरुचि का अभिवर्धन किया।अतिथियों का आदर-सत्कार रुद्राक्ष की माला एवं अंगवस्त्र से काशी धर्मपीठ, रामेश्वर मठ की ओर से डा. वरुणेश चन्द्र दीक्षित के द्वारा किया गया।

भारत सरकार को वैदिक सम्पदा से आपूरित करने हेतु उपरोक्त विशिष्ट संस्थाओं द्वारा भव्य नित्यप्रति पूर्णिमा को सर्ववेद शाखा स्वाध्याय प्रतियोगिता का आयोजन निहित हुआ।

इस कार्यक्रम में वेदमूर्ति श्री शालीग्राम शर्मा, प्राचार्य – (आचार्य गोपाल चन्द्र मिश्र वैदिक उन्नयन संस्थान ), श्री ज्योति स्वरूप तिवारी (आचार्य, श्रीपट्टाभिराम शास्त्री वेद मीमांसा अनुसन्धान केन्द्र), आचार्य दुष्यन्त मिश्र, प्राध्यापक श्री संन्यासी संस्कृत महाविद्यालय, आचार्य डॉ.जयन्तपति त्रिपाठी (प्राचार्य – श्री स्वामी नारायणानन्दतीर्थ वेद विद्यालय), रामयश मिश्र, (वरिष्ठ पत्रकार) अनेक विद्यालयों तथा अन्यान्य विशिष्ट संस्थानों से आचार्यों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।

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