इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के यात्री दल ने किया ,जगतगंज कोठी का भ्रमण

 

विस्तार से जाना स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू जगत सिंह का इतिहास 

 

नौका विहार और सारनाथ का किया भ्रमण 

 

वाराणसी। टूर मैनेजर मणिकांत जैन का मानना है- किसी देश की विरासत और संस्कृति को जानने के लिए, व्यक्ति को कुछ बताने से बेहतर है , उसे स्थानीय व्यक्तियों से मुलाकात कराई जाए । भारत वसुधैव कुटुंबकम में यकीन रखता है और हमारी संस्कृति दुनिया की प्राचीनतम संस्कृतियों में शुमार की जाती है । काशी भ्रमण का यह एक मुख्य उद्देश्य है। दिल्ली से चलकर इक्कीस सदस्यीय ,इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड का यात्री दल ,शनिवार को वाराणसी पहुंचा। सायंकालीन सत्र में यात्री दल ,अपने टूर मैनेजर मणिकांत जैन के नेतृत्व में, रिक्शा का आनंद उठाते हुए बाबू जगत सिंह की कोठी पहुंचा। जहां शोध समिति के सदस्य प्रदीप नारायण सिंह एवं डॉ.( मेजर ) अरविंद कुमार सिंह ने अपनी पूरी टीम के साथ यात्री दल का स्वागत किया। टूर मैनेजर एवं टूरिस्ट गाइड अशोक वर्मा ने 1799 में अंग्रेजों के खिलाफ, बाबू जगत सिंह द्वारा काशी में की गई बगावत का विस्तार से विवरण रखा। प्रदीप नारायण सिंह ने यात्री दल को कोठी का भ्रमण कराते हुए ,शोध समिति के अंतर्गत प्राप्त महत्वपूर्ण दस्तावेजों से सभी को परिचित कराया। यात्री दल ने रविवार को प्रातः कालीन सत्र में जहां काशी की गलियों में विरासत की सैर की, वहीं सायंकालीन सत्र में सभी ने सारनाथ की सैर कर आवश्यक जानकारी प्राप्त की। गलियों की सैर करते हुए यह दल क्षेमेश्वर घाट, केदार मंदिर, हरिश्चंद्र घाट, होते हुए अस्सी घाट तक पहुंचा। तत्पश्चात पूरे दल ने नौका विहार का लुत्फ उठाया।दिल्ली प्रवास के अंतर्गत इस दल ने बिरला भवन ,जमा मस्जिद, इंडिया गेट ,कुतुब मीनार ,राष्ट्रपति भवन, संसद भवन एवं बिरला मंदिर को देखा और समझा। यह दल सोमवार को अपराह्न खुजराहो प्रस्थान करेगा।

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