वाराणसी। प्रेमचंद आधुनिक भारतीय साहित्य के ऐसे लेखक हैं। जिनकी रचनाओं में निहित वैचारिकता के पुनर्पाठ की आवश्यकता हर दौर में और अधिक प्रासंगिक लगने लगती है। यह बातें प्रो. श्रद्धानंद ने प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा प्रेमचंद स्मारक स्थल लमही में आयोजित सुनों मैं प्रेमचंद कहानी पाठ 1469 दिवस पूर्ण होने पर कहीं । प्रेमचंद की कहानी शांति का पाठ डा अपर्णा पाण्डेय ने किया। सम्मान प्रो. श्रद्धानंद, निदेशक राजीव गोंड, डा. सूर्यकांत त्रिपाठी, बीना त्रिपाठी ने किया। कहानी की समीक्षा करते हुए श्री त्रिपाठी ने कहा कि शांति कहानी भी प्रेमचंद के इसी उद्देश्य की पूर्ति करती है कि पाश्चात्य सभ्यता के रंगों में रंगी हिंदुस्तानी स्त्री नैतिकता का आत्मबल खो देती है। वह शक्ति जिसके बल पर वह विषम से विषम परिस्थितियों में भी विजय प्राप्त कर सकती है। इस अवसर मनोहर , अविनाश पाण्डेय, अनन्या, हेमलता पाण्डेय, मोहिनी, मदन लाल, चंदन पटेल, रामजी सिंह, रोहित गुप्ता, संजय श्रीवास्तव, इंसान खान, सुरेश दूबे, राहुल विश्वकर्मा, राहुल यादव, अंकित सिंह,आयुषी दूबे, मनोज विश्वकर्मा, प्रो मनोहर आदि थे।

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