
एम्पावरिंग एजुकेटर्स इन द ग्लोबल साउथ कार्यशाला में छठवां दिन

वाराणसी।‘एम्पावरिंग एजुकेटर्स इन द ग्लोबल साउथ’ विषय पर आठ दिवसीय कार्यक्रम अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी परिसर में आयोजित है। यह कार्यक्रम यूनेस्को एमजीआईईपी, नई दिल्ली और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
छठे दिन कुल चार सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सामाजिक-भावनात्मक अधिगम (SEL) में भावनात्मक विनियमन और भूमिका निभाने के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इन सत्रों में खेल-आधारित शिक्षण, सहपाठी संवाद और भूमिका निभाने की प्रक्रिया के माध्यम से सामाजिक- भावनात्मक कौशल विकसित करने के महत्व पर जोर दिया गया।
पहले सत्र में चर्चा की गई कि खेल-आधारित विधियाँ रचनात्मकता और समस्या-समाधान क्षमताओं को कैसे बढ़ाती हैं। दूसरा सत्र सहपाठियों के बीच संवाद और सहयोगी अधिगम में प्रभावी प्रतिक्रिया की भूमिका पर केंद्रित था।
अंतिम वार्ताओं में भूमिका निभाने को एक प्रभावी सामाजिक- भावनात्मक शिक्षण (SEL) उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें सहानुभूति और संचार कौशल पर इसके प्रभाव को दर्शाया गया। शिक्षकों ने अपने पूर्व सफल अनुभव साझा किए और आधुनिक कक्षाओं में नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। सभी सत्र व्यावहारिक गतिविधियों और प्रयोगात्मक शिक्षण पर आधारित थे।
इस कार्यक्रम में 19 देशो के 60 शिक्षक भाग ले रहे है।
सत्र के वक्ताओं अन्या चक्रवर्ती, भाव्या, श्रेया तिवारी, और रेणुका रौतेला ने प्रतिभागियों के साथ अपनी विशेषज्ञता साझा की। इस कार्यक्रम का समन्वय आईयूसीटीई के कार्यक्रम निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव और यूनेस्को एमजीआईईपी, नई दिल्ली की राष्ट्रीय परियोजना अधिकारी श्रीमती अर्चना चौधरी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के कोर्स समन्वयक डॉ. कुशाग्री सिंह और डॉ. राजा पाठक है।
