
वाराणसी। डाफी स्थित कमला आर्शीवाद वाटिका में चल रहे श्रीमद् देवी भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को कथा का अमृतपान कराते हुए देवी उपसिका साध्वी गीताम्बा तीर्थ ने कहा कि देवी भागवत का पारायण सिर्फ मानव ही नहीं देवता भी करते हैं। कथा का वर्णन करते हुए साध्वी ने कहा कि जब रावण माता सीता का हरण कर लिया तो भगवान राम और लक्ष्मण वन-बन सीता जी की खोज रहे थे। वन में भटकते हुए जब वह किष्किंधा है पर्वत के पास पहुंचे तो आकाश मार्ग से जाते हुए महर्षि नारद उनको देखकर बहुत दुखी हुए और वह नीचे आकर भगवान राम और लक्ष्मण को देखकर कहां की है प्रभु आप इस तरह सब कुछ जानते हुए भी क्यों भटक रहे हैं आप क्यों नहीं आदि शक्ति की आराधना कर रहे हैं।
भगवान राम और लक्ष्मण के कहने पर नारद जी ने किष्किंधा में देवी भागवत का पारायण भगवान राम को कराया। इसके पश्चात आदि शक्ति प्रसन्न हुई और सीता जी की खोज शुरू हुआ और इसके पश्चात भगवान राम ने रावण में रावण की सेना को परास्त किया और लंका पर विजय प्राप्त की ।
साध्वी गीताम्बा ने कहा कि बिना शक्ति की पूजा के कोई भी कार्य संभव नहीं है। जब तक आप शक्ति की पूजा नहीं करेंगे तब तक आपको बल बुद्धि और विद्या प्राप्त नहीं होगा ।
उन्होंने कहा कि कर्मों का फल सभी को भोगना पड़ता है चाहे वह देवता ही क्यों ना हो उन्होंने कहा कि भगवान राम को जालंधर की पत्नी बृन्दा का श्राप लगा था जिसके कारण उन्हें आज जंगल में दर-दर भटकना पड़ रहा है उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु ने जालंधर का वध, जालंधर की पत्नी वृंदा का सतित्व हरण करके किया था। जब बृन्दा को यह पता चला तो उसने भगवान विष्णु को श्राप दिया दिया की जाइए पत्नी के वियोग में आप जंगल में दर-दर भटकेंगे।
साध्वी ने कहा की आज मानव बल बुद्धि विद्या इन तीनों शक्तियों को पाने के लिए ललाईत तो है लेकिन वह गर्भ में ही बेटियों को मार दे रहा है जिसके कारण उसे कुछ भी प्राप्त नहीं हो रहा है अगर हम भूल कन्या भ्रूण हत्या करेंगे तो यह चीज कैसे संभव है।
