
वाराणसी।यह महोत्सव न केवल व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण है बल्कि हमारे साहित्य संवाद एवं संस्कृति को भी समृद्ध करने का अनुपम प्रयास है।जयशंकर प्रसाद ने अपनी कविताओं में प्रकृति और मानवता को बल दिया है। उन्होंने प्रकृति की सुंदरता और शक्ति का वर्णन किया है, और मानवता की गरिमा और मूल्यों को महत्व दिया है।उनकी कविताओं में प्रकृति के साथ मानवता के संबंधों का वर्णन किया गया है, और यह दिखाया गया है कि प्रकृति और मानवता के बीच एक गहरा संबंध है।
प्रसाद जी ने अपनी कविताओं में मानवता की विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रेरित किया है, जैसे कि प्रेम, करुणा, और आध्यात्मिकता।उनकी कविताओं में प्रकृति और मानवता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीयता का भी वर्णन किया गया है, जो उनकी कविताओं को एक अद्वितीय सौंदर्य और गहराई प्रदान करता है।उक्त विचार प्रो० वन्दना सिंह, कुलपति, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचलविश्वविद्यालय,जौनपुर ने उक्त सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के ऐतिहासिक मुख्य भवन में गुरुवार को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान परम्परा के सनातन संवाहक:जयशंकर प्रसाद के विशेष संदर्भ मे विषय पर उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किया।
कुलपति प्रो वंदना सिंह ने कहा कि जयशंकर प्रसाद के दर्शन में साहित्य और कला की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे साहित्य को जीवन की वास्तविकता को प्रतिबिंबित करने और मानव जीवन को समृद्ध बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। कला और संस्कृति के संबंध में वे इन्हें जीवन की वास्तविकता को प्रतिबिंबित करने और मानव जीवन को समृद्ध बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।
विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता
प्रो० अवधेश प्रधान, पूर्व विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, का०हि०वि०वि०. वाराणसी ने बतौर विशिष्ट अतिथि कहा कि जयशंकर प्रसाद और स्वामी विवेकानंद दोनों ही महान व्यक्तित्व थे। प्रसाद जी एक महान कवि, नाटककार और उपन्यासकार थे, जबकि स्वामी विवेकानंद एक महान दार्शनिक, संत और समाज सुधारक थे। प्रसाद जी की कविताओं में आध्यात्मिक और प्रेम की भावनाएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों में अध्यात्म, दर्शन और समाज सुधार की भावनाएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं। दोनों ही महान व्यक्तित्वों ने अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रसाद जी की कविताएँ हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों ने पूरे विश्व में लोगों को प्रभावित किया है। जयशंकर प्रसाद का दर्शन आध्यात्मिक मानवतावाद पर आधारित है। वे मानव जीवन की आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों पर जोर देते हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों में भी आध्यात्मिकता और मानवतावाद की भावनाएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं।
श्री राकेश कुमार (आई०ए०एस०) कुलसचिव, स०सं०वि०वि०, वाराणसी ने कहा कि जयशंकर प्रसाद ने चिन्मय भारत के विकास को देखा और उन्होंने केवल भोग की बात नहीं की, बल्कि दुख को भी साथ लेकर चलने की बात कही। उनकी कविताओं में आध्यात्मिक और प्रेम की भावनाएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं ।
अध्यक्षता प्रो० रामकिशोर त्रिपाठी वरिष्ठआचार्य वेदांत, सं०सं०वि०वि०, वाराणसी ने कहा कि जयशंकर प्रसाद का दर्शन एक समृद्ध और विविध विचारधारा है, जिसमें आध्यात्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, नैतिक और मानवतावादी दृष्टिकोण शामिल हैं।
वाचिक स्वागतवेदांत के आचार्य प्रो० सुधाकर मिश्र, सं०सं० वि० वि०, वाराणसी ने वाचिक स्वागत करते हुये कहा कि ऐतिहासिक भवन में आज ऐतिहासिक महापुरुष पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में निश्चित ही विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी।
डॉ० कविता प्रसाद, प्रपौत्री- महाकवि जयशंकर प्रसाद ने जयशंकर प्रसाद जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रीय संगोष्ठी
विषय: भारतीय ज्ञान परम्परा के सनातन संवाहक जयशंकर प्रसाद के विशेष संदर्भ में प्रथम तकनीकी सत्र।
विषय प्रसाद साहित्य में दर्शन एवं कला
अध्यक्षता- प्रो० हरि प्रसाद अधिकारी ,विशिष्ट अतिथि- प्रो० रजनीश कुमार शुक्ल,
मुख्य अतिथि- डॉ० आनन्द मिश्र, विभाग की।सारस्वत अतिथि- डॉ० सुनील कुमार विश्वकर्मा, अध्यक्ष ललित कला अकादमी।संचालन- डॉ० दुर्गेश पाठक, न्याय वैशेषिक विभाग, सं. सं. वि. वि.वाराणसी।
द्वितीय सत्र
विषय: भारतीय ज्ञान परम्परा के सनातन संवाहक जयशंकर प्रसाद के विशेष संदर्भ में-
वक्तागण डॉ० अत्रि भारद्वाज,एवं साहित्यकार,प्रो० कल्पलता पाण्डेय, पूर्व कुलपति ज. च. वि.वि. बलिया।प्रो० सुमन जैन, आचार्य हिन्दी विभाग महिला महाविद्यालय, काशी हिन्दूविश्वविद्यालय,वाराणसी।प्रो० राम सुधार सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष यू. पी. कालेज, वाराणसी डॉ० प्रीति जायसवाल, हिन्दी विभाग महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ वाराणसी आदि ने जयशंकर प्रसाद के जीवन दर्शन पर विभिन्न मतों को सारांश दिया।
धन्यवाद ज्ञापन श्री अवधेश कुमार गुप्ता, न्यासी महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
*राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रारम्भ में*–
*मंगलाचरण*–
वैदिक प्रो महेंद्र पाण्डेय..पौराणिक…डॉ अखिलेश मिश्र
संयोजक एवं संचालन
डॉ0 विशाखा शुक्ला, सह समन्वयक, आई0क्यू0ए0सी0
उपस्थित ज़न प्रो कल्पलता पाण्डेय, प्रो•रजनीश कुमार शुक्ल,प्रो सुनील विश्वकर्मा, प्रो हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो• प्रोफेसर महेंद्र पाण्डेय, प्रो• हीरक कांत चक्रवर्ती,प्रो सुमन जैन, सहायक कुलसचिव विनायक दुबे,सत्येन्द्र अग्रवाल,हिमांशु शुक्ल,प्रभु सिंह यादव, गोविंद त्रिपाठी आदि ने सहभागिता किया।
