वाराणसी।पांडुलिपि संरक्षण कार्यशाला के समापन पर पांडुलिपियों का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक धरोहर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये पांडुलिपियां हमारे अतीत की कहानी कहती हैं और हमें अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर प्रदान करती हैं।पांडुलिपि संरक्षण कार्यशाला का आयोजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने पांडुलिपियों के संरक्षण और पुनरुद्धार के तरीकों पर प्रकाश डाला, जिससे ये पांडुलिपियां आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रहें।

उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने शुक्रवार को योग साधना केन्द्र में संस्कृत विश्वविद्यालय एवं ज्ञान भारतम( राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन,संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला ( मेटाडेटा निर्माण और पांडुलिपि संरक्षण कार्यशाला)का समापन में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित करते हुये बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किया।

कुलपति प्रो शर्मा ने आगे कहा कि हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे। हमें अपने युवाओं को भी इस दिशा में प्रेरित करना होगा, ताकि वे अपनी जड़ों को समझें और उनका सम्मान करें।प्रत्येक पांडुलिपियों के प्रत्येक फोलियो मे आप माँ भारती के प्रतिबिंब महसूस करिए जो दिखाई देगा, निश्चित ही आपको एक भाव से संरक्षण की गति मे बल मिलेगा।

इस अवसर पर प्रो शर्मा ने कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को बधाई दी और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला न केवल पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए एक साझा प्रयास है।इस कार्य में भारत सरकार ने समुचित अर्थ का सहयोग किया है, इसलिये इसमें मेन पावर बढ़ाकर इसकी गति को और गतिमान करें। पुस्तकालय विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो हीरक कांत चक्रवर्ती ने कार्यशाला के अनुभव को साझा कर विभिन्न प्रयोगों पर बल दिया।डिजिटल कर जनोपयोगी बनाये जाने पर जोर दिया।

मंच पर आसीन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।

पांच दिनों से चल रहे पांडुलिपि संरक्षण कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले 02 दर्जन प्रतिभागियों को कुलपति एवं अतिथियों के द्वारा प्रमाणपत्र देकर उनके द्वारा सीखे गये अनुभव को साझा किया।

*स्वागत और अभिनंदन*–

पुस्तकालय अध्यक्ष प्रो राजनाथ ने अतिथियों को पुष्प गुच्छ एवं अंग वस्त्र ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत और अभिनंदन करते हुए पांडुलिपि संरक्षण के संबंध में सम्पूर्ण विषय पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम की संयोजिका डॉ विभा पाण्डेय ने सभी विषयों को विस्तार से बताया कि इस कार्य को कैसे गति देना है।

उक्त अवसर पर डॉ प्रमोद कुमार पाण्डेय, डॉ अवध किशोर डॉ विभा पाण्डेय,डॉ संजय कुमार मिश्र,प्रभु नाथ सिंह यादव सहित कार्यशाला में प्रतिभागियो ने उपस्थित रहकर सहभाग किया थे।

 

प्रेषक..

जनसम्पर्क अधिकारी

24 मार्च 2025

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