युद्ध कांड का पारायण जारी, विभीषण को विशेष पूजा समर्पित 

 

वाराणसी। प्रभु श्री राम की असीम अनुकंपा से बानर- भल्लूकों की सेना ने समुद्र पर तैरते पत्थरों का सेतु बांध दिया। श्री राम सेना जब उसपार लंका में उतरती है तो दिन वत्सल श्री राम प्रभु इस संपूर्ण सफलता का श्रेयस उन बानर-भल्लुकों को देते हैं जिन्होंने राम काज के लिए अपना पूरा जीवन ही अर्पित कर दिया। प्रभु के इसी उदर भाव को अनुष्ठानिक कर्मकांडो के साथ पिरोते हुए श्री राम पट्टाभिषेक महोत्सव के यागिकों ने शुक्रवार को इन बानर -भल्लू योद्धाओं के नाम यज्ञ की आहुतियां प्रदान की। उनके नाम श्रेयस का चंदन समर्पित किया गया।

उधर महोत्सव की जाप दीर्घा में आज बाल्मीकि रामायण के युद्धकांड का पारायण जारी रहा। शरणागत वत्सल श्री राम प्रभु के विभीषण पर असीम कृपा का प्रसंग उठाया गया। इसका पारायण करते हुए यज्ञ के आचार्यों ने विभीषण को विशेष पूजा भी अर्पित की। कुंभकर्ण के पराभव के प्रसंग तक पहुंचकर पारायण को विश्राम दिया गया। यज्ञ और पारायण के साथ ही उत्सव मंडप में श्री गायत्री और श्री राम गायत्री मंत्रों का संपूट पाठ भी चल रहा है।

आश्रम के प्रबंध न्यासी व यज्ञ के मुख्य यजमान वीवी सुंदर शास्त्री सभी कर्मकांडो को विधि पूर्वक संपादित कर रहे हैं। उत्सव के संयोजन की जिम्मेदारी वहन कर रहे आश्रम के प्रबंधक वीवी सीताराम है।

मुख्य रूप से श्याम राव, बुध शर्मा, शिव शर्मा, गजानन जोशी, अनुपम भट्टाचार्य, जितेंद्र देव सिंह, श्रीमती उमा शास्त्री, वेमुरी धरनिजा, आदि लोग उपस्थित रहे।

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