वाराणसी।वसंत कन्या महाविद्यालय में महिला अध्ययन प्रकोष्ठ एवं युवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में संचालित छह दिवसीय लिंग-संवेदनशीलता अनुसंधान कार्यक्रम के अंतर्गत तृतीय दिवस, गुरुवार को दो सत्रों में कार्यशाला का आयोजन किया गया।

प्रथम सत्र में ‘महिलाएं, लिंग और विज्ञान’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया, जबकि द्वितीय सत्र में ‘स्वास्थ्य संचार और लिंग: स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर केंद्रित अध्ययन’ विषय पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत प्रस्तुति दी गई। कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने शुभकामनाएं दी।

कार्यक्रम के पहले सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. ध्रुब कुमार सिंह (प्रो•, इतिहास विभाग, बीएचयू) उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि का स्वागत डॉ अनुराधा बापुली द्वारा किया गया।

वक्ता ने बताया कि आज विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है और मानव उसके साथ अधिक सशक्त संबंध स्थापित कर रहा है। उन्होंने बताया कि रसोईघर महिलाओं के लिए एक प्रकार की “रसायन प्रयोगशाला” के रूप में देखा जा सकता है, जहाँ पाक-कला विज्ञान का एक सरल उदाहरण है। समय के साथ महिलाएं पेशेवर रूप से भी विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ी हैं, विशेषकर होम साइंस जैसे विषयों के माध्यम से। परन्तु होम साइंस को एक पेशेवर और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए था, पर यह भी लैंगिक पूर्वाग्रह का शिकार होकर सीमित दायरे में रह गया। हालांकि, विज्ञान के विकास में जेंडर बायस और पदानुक्रम जैसी बाधाएं बनी रहीं, जो उचित नहीं हैं। विज्ञान एक सार्वभौमिक ज्ञान है, जिसका किसी एक राष्ट्र या एक लिंग से संबंध नहीं होता। इसका विकास निरंतर परिवर्तन और प्रयोग के माध्यम से होता है।

अंततः उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास में दोनों लिंगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और विज्ञान के विकास के बिना समग्र प्रगति संभव नहीं है। संक्षेप में, विज्ञान की भागीदारी के बिना लैंगिक संवेदनशीलता को सही नहीं किया जा सकता और न ही महिला सशक्तिकरण संभव है। केवल विज्ञान ही जेंडर से जुड़ी रूढ़ियों को तोड़ सकता है।

 

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. नैना गुप्ता (एपेक्स हॉस्पिटल, वाराणसी) उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में ‘स्वास्थ्य संचार और लिंग: स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर केंद्रित अध्ययन’ विषय पर विस्तृत रूप से अपने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियां हैं, जिनके पीछे प्रमुख कारणों में जागरूकता की कमी, असंतुलित जीवनशैली, एचपीवी (HPV) संक्रमण, समय पर जांच न कराना तथा स्वच्छता की अनदेखी शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि कई महिलाएं संकोच या जानकारी के अभाव में शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। आगे चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इन कैंसरों से बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक है। स्तन कैंसर के लिए स्वयं स्तन परीक्षण (Self Breast Examination) और समय-समय पर मैमोग्राफी करवाना चाहिए, जबकि गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव हेतु एचपीवी वैक्सीनेशन और पाप स्मीयर टेस्ट कराना जरूरी है। इसके साथ ही व्यक्तिगत स्वच्छता, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी उन्होंने जोर दिया।उन्होंने स्वास्थ्य संचार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सही और सरल जानकारी का व्यापक प्रसार महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और सशक्त बनाता है। अंत में उन्होंने सभी से अपील की कि वे नियमित जांच कराएं और अन्य महिलाओं को भी इसके प्रति जागरूक करें।

कार्यशाला का सफलतापूर्वक संयोजन डॉ अनुराधा बापुली तथा संचालन डॉ श्वेता सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यशाला के आयोजन समिति के सदस्य जिनमें डॉ. सुप्रिया, डॉ. प्रियंका, डाॅ. शशिकेश, डॉ. मालविका, डॉ. शुभांगी , डॉ अनु सिंह आदि उपस्थित रहे।

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