वाराणसी।‌ इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन वाराणसी चैप्टर और साईं इंस्टीट्यूट ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट के बीच बुधवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य ग्रामीण विकास, स्किल डेवलपमेंट, महिला सशक्तिकरण और इंडस्ट्री-इंस्टीट्यूट कोऑपरेशन को सशक्त बनाना है।मुख्य अतिथि एमएसएमई मंत्रालय के सहायक निदेशक आरके चौधरी ने कहा कि इस प्रकार के समझौतो से उद्योगों एवं ग्रामीण में रहने वाले लोगों के मध्य विचार विमर्श एवं आपसी सहयोग का वातावरण तैयार होता है जो विकास, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सार्थक कदम है। आईआईए के राष्ट्रीय सचिव राजेश भाटिया और साईं इंस्टीट्यूट के निदेशक अजय कुमार सिंह की उपस्थिति में समझौता हुआ। दोनों संस्थाओं ने एक-दूसरे के कार्यों में सहयोग देने, साझा परियोजनाओं पर मिलकर काम करने, और युवाओं व महिलाओं को उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण देने की प्रतिबद्धता जताई। श्री भाटिया ने कहा कि हमारा उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाओं की उद्यमिता की पहचान कर, उन्हें सहयोग प्रदान कर उद्योग से जोड़ना है। साईं इंस्टीट्यूट के निदेशक अजय कुमार सिंह ने कहा कि यह समझौता ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता की ओर एक सेतु बनेगा। हम उन्हें सशक्त बनाने के लिए तकनीकी सहयोग और सही मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी। उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, ब्रांडिंग, पैकेजिंग तथा विपणन में सहायता प्रदान करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इससे ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में एक ठोस कदम बढ़ेगा और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार करने में योगदान मिलेगा।

इस समझौते को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस अवसर पर आईआईए के डिविजनल चेयरमैन अनुपम देवा, प्रशांत अग्रवाल,चैप्टर चेयरमैन मनीष कटारिया राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य नीरज पारीख, ज्ञानेश्वर अंजनी सिंह आदि थे।

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