संगीतमय रामकथा का नवां दिन

 

वाराणसी ।अखिल भारतीय सनातन न्यास जैतपुरा वाराणसी द्वारा आयोजित रामकथा समापन के अवसर पर अंतिम दिन पातालपुरी पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु नरहरियानंद बालक देवाचार्य जी महाराज ने बताया कि युद्ध में परिवार सहित दशानन को लंका में मारे जाने की सूचना मिलने पर समस्त देवी देवताओं ने आकाश मार्ग से फूलों की वर्षा करते हुए राजा रामचंद्र की जय, सीता पति महाराज अयोध्या नरेश की जय जय कार करने लगे। उन्होंने आगे कहा कि पूरी रामायण कथा हमें यह संदेश देती हैं कि इस घोर कलयुग में भी जिस घर में प्रतिदिन रामायण की चर्चा की जाती हैं, वहां सुख – शांति – समृद्धि स्वयं निवास करती हैं। इस सद्ग्रंध में पुत्र की माता पिता के प्रति, भाई भाई में, आपस में प्रेम परस्पर सदैव बनाए रखने, समाज में जनता की सदैव खुशहाली तथा उनके देख भाल एवं सुरक्षा का भी दायित्व पूर्ण करने की सीख देता हैं। यह ग्रंथ समय समय पर त्याग, तपस्या एवं बलिदान देने के लिए सदैव लोक हित में कार्य करने की भी प्रेरणा देता हैं।

कथा के प्रथम वक्ता के रूप में सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित वेदप्रकाश मिश्र कलाधर ने कहा कि जहां जहां राम कथा का आयोजन किया जाता हैं उस स्थान पर कथा सुनने वाला एवं आयोजनकर्ता परिवार की तथा सभी भक्तजनों की प्रभु सदैव रक्षा करते है और वैभव ज्ञान समृद्धि एवं उनके परिवार में सदैव खुशहाली बनी रहती हैं।

मंच का संचालन प्रधान सचिव राजेश सेठ ने किया।

इस अवसर पर व्यास पीठ की आरती ज्ञानचंद मौर्य, संजय गुप्ता, विष्णु गुप्ता, मोहन लाल, जयशंकर गुप्ता, रवि प्रकाश जी, प्रमोद यादव मुन्ना, वतन कुशवाहा, सुरेन्द्र कुमार, शिशिर कुमार, अनामिका जी, सुधा जी, ज्योति जी, किशोर सेठ, अभय स्वाभिमानी ने आरती उतारी।

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