
एक पखवाड़े तक करेंगे आराम भक्तों को नहीं मिलेगा दर्शन, मंदिर का पट रहेगा बंद
वाराणसी ।जेष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर बुधवार को आसि स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा एवं बलभद्र का भक्तों ने जलाभिषेक कर उनसे सुख समृद्धि की कामना की ।
ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के तत्वावधान में सुबह 5 बजे अस्सी घाट से जल यात्रा निकाली गई। मिट्टी के घड़े में गंगाजल भर कर श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान जगन्नाथ बलभद्र एवं सुभद्रा का जलाभिषेक किया। मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित राधेश्याम पांडे ने ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी दीपक शापुरी की उपस्थिति में भगवान का मिट्टी के 51 घड़ो में रखे गंगाजल से जलाभिषेक कर उनका नयनाभिराम श्रृंगार पूजन कर भव्य आरती की । जलाभिषेक एवं पूजन में ट्रस्ट के अध्यक्ष पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह, ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी, प्रोफेसर गोपबंधु मिश्रा, डॉक्टर शुकदेव त्रिपाठी, उत्कर्ष श्रीवास्तव समाजसेवी रामयश मिश्र उपस्थित थे।
इसके पश्चात भक्तों द्वारा जलाभिषेक का क्रम शुरू हुआ भक्तों द्वारा गंगा जी से गंगा जल भर कर लाया गया और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा का गंगाजल से जलाभिषेक किया । जलाभिषेक देर शाम तक चला। ऐसी मान्यता है कि भक्तों के अत्यधिक जलाभिषेक के कारण भगवान बीमार पड़ जाते हैं और एक पखवारे तक वह आराम करते हैं।
ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी नें बताया कि एक पखवारे तक भगवान को प्रतिदिन काढे का भोग लगता है और भगवान 15 दिन तक आराम करने के पश्चात जगन्नाथ मंदिर से डोली मैं बैठकर रथयात्रा हवा खोरी के लिए निकलते हैं जहां पर 3 दिन का विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा मेला लगता है।
समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रहरी रामयश मिश्र ने कहा कि भगवान जगन्नाथ के जलाभिषेक से हमें यह सीख मिलती है कि किसी चीज का अति बुरा है । भगवान जगन्नाथ का इतना जलाभिषेक कर दिया जाता है कि वह बीमार पड़ जाते हैं। ठीक इसी प्रकार प्रकृति से मिले अनमोल रत्न हवा पानी मिट्टी पर्वत का अत्यधिक दोहन करने के कारण वह खत्म होने के कगार पर है और नहीं तो वह बुरी तरह से प्रदूषित हो कर समाप्त हो रहे हैं । इस जलाभिषेक के माध्यम से यह बताने का प्रयास हैं कि प्रकृति में संतुलन बनाकर चलने से ही सभी की भलाई है।
जलाभिषेक मेँ हरीश वलिया, आशु त्रिपाठी, दिलीप मिश्रा, गीता शास्त्री, नवीन जी, कमलेश जी आदि कमलेश सहित हजारों की संख्या में भक्ति शामिल थे।











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