वाराणसी ।काशी के मूर्धन्य विद्वान श्री वल्लभराम शालिग्राम सान्गवेद विद्यालय के पूर्व अध्यक्ष प्रातः स्मरणीय पंडित प्रवर गुरुवर श्री रामचंद्र शास्त्री होसमने जी की 39 वीं स्मृति सभा मंगलवार को रामघाट स्थित सान्गवेद विद्यालय में पंडित प्रवर पांडुरंग लक्ष्मीकांत पुराणिक जी की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष पंडित प्रवर विश्वेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने गुरुवार पंडित होसमने शास्त्री के आदर्श जीवन पर प्रकाश डाला ।

पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने कहा कि पंडित होसमने शास्त्री जी ने अपना संपूर्ण जीवन विद्यालय के लिए समर्पित कर दिया। उनके द्वारा स्थापित आदर्शों पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर स्वर्गीय दाजी पणशीकर के प्रति भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।

विद्यालय के अध्यापक पंडित श्री हेमंत मोघे जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई।

सभा की अध्यक्षता करते हुए पंडित प्रवर पांडुरंग लक्ष्मीकांत पुराणिक ने कहा कि सॉन्गवेद विद्यालय का स्थान एक पवित्र मंदिर है। इसकी स्थापना जिन विभूतियों ने की है उनके स्मरण मात्र से ही हम पवित्र हो जाते हैं। पंडित होसमने शास्त्री जी महान विभूति थे। निस्वार्थ भाव से वे इस विद्यालय के उत्कर्ष के लिए लगे थे। विद्यालय में जब छात्रों की परीक्षा होती थी तो सभी छात्र चाहते थे की पंडित होसमने शास्त्री जी उनकी परीक्षा ले। वे छात्रों के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे ।उनकी कृपा दृष्टि छात्रों पर हमेशा बनी रहती थी। आज उनकी स्मृति सभा के अवसर पर हम उनको पुनः पुनः प्रणाम करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि उनकी छत्रछाया हम सब पर बनी रहे।

इस अवसर पर अयोध्या में श्री राम जी की स्थापना के विषय में भी चिंतन किया गया।

स्मृति सभा में पंडित शिवमूर्ति उपाध्याय, शुभंकर बाबू, मुन्नू सिंह ,प्रोफेसर माधव जनार्दन रटाटे ,पंडित तरुण कुमार पांडेय, चक्रवर्ती विजय नावड, देवानंद मणि त्रिपाठी,कृष्ण गोपाल शर्मा, जितेंद्र द्विवेदी, रंगनाथ बादल , पराग पायगुंडे ,पं राजराजेश्वर द्रविड़, पंडित वेंकटेश्वर द्रविड़, गिरधर शर्मा ,प्रदीप कुमार बिंद आदि उपस्थित थे।

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