
योग फार मांइडफूलनेश एण्ड बेलनबीइंग विषयक छः दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ
वाराणसी । सोमवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, बीएचयू, वाराणसी तथा अंतर विश्वविद्यालय योगिक विज्ञान केंद्र, बैंगलोर के संयुक्त तत्वाधान में ‘फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम: ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स : योग फॉर माइंडफुलनेस एंड वेलन बीइंग’ विषय पर छः दिवसीय कार्यक्रम का शुभारम्भ आई.यू.सी.टी.ई. परिसर में हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण व मां सरस्वती तथा महामना मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. ए. सी. पांडेय , निदेशक, आईयूएसी , नई दिल्ली तथा अंतर विश्वविद्यालय योगिक विज्ञान केंद्र, बैंगलोर, तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. एन. पी. सिंह, चेयरमैन, भारतीय शिक्षा बोर्ड, सेवानिवृत्त आईएएस थे। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू ने की।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. ए. सी. पांडेय ने चेतना अध्ययन की जटिलताओं पर चर्चा की, यह रेखांकित करते हुए कि इसकी वास्तविक प्रकृति को परिभाषित करना और समझना सबसे बड़ी चुनौती है। विशिष्ट अतिथि डॉ. एन. पी. सिंह ने वेदों और उपनिषदों में वर्णित “अभ्युदय” की सारगर्भित व्याख्या की, जिसमें उन्होंने मूल्यों और ज्ञान को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और आत्म-साक्षात्कार के महत्व को रेखांकित किया।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए केंद्र के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया और अनुशासन को मानव जीवन का मूल बताया। साथ ही सभी की उपस्थिति की सराहना की।
द्वितीय सत्र में, प्रो. सुशिम दुबे, अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग, एनएनएम, नालंदा ने योग और माइंडफुलनेस के दर्शन एवं उत्पत्ति पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने इन प्राचीन प्रणालियों के गहरे स्वरूप को उजागर करने वाले प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला। अपने उद्बोधन में उन्होंने बताया कि योग को “कर्म में कौशल” के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो इस बात को रेखांकित करता है कि सचेत और कुशल कर्म हमारे दैनिक जीवन में कितना महत्वपूर्ण है। इसके बाद, डॉ. शैलेंद्र बहादुर सिंह ने योग के व्यावहारिक पक्ष का अभ्यास कराया, जिससे प्रतिभागियों को योग की विधियों को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का अवसर मिला।
अतिथियों का स्वागत प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख, शिक्षण व शोध ने किया। विषय उपस्थापन प्रो. अजय कुमार सिंह ने किया। मंगलाचरण डॉ. राजा पाठक तथा संचालन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुशाग्री सिंह ने किया। इस कार्यकम के संयोजक प्रो. अजय कुमार सिंह तथा सहसंयोजक डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी तथा डॉ. कुशाग्री सिंह थी।
इस कार्यकम में १४ प्रदेशों के ५० से अधिक शिक्षक भाग ले रहे हैं।
