वाराणसी।ब्लॉक संसाधन केंद्र चिरईगांव,शुक्रवार को एक अतिमहत्वपूर्ण बैठक हुईं।  जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), सारनाथ, वाराणसी के प्राचार्य श्री उमेश शुक्ला का शुभागमन हुआ। बैठक में खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती प्रीति सिंह, जिले वाराणसी के तीनों SRGs श्री अखिलेश्वर सिंह,, श्री राजीव कुमार सिंह, श्री कुंवर भगत सिंह ,ARPs में श्री श्रीनिवास सिंह, श्रीमती रश्मि त्रिपाठी, पूर्व ARP में श्री वरुण चतुर्वेदी, श्री अनंत कुमार सिंह , श्री संतोष तिवारी और हमारे शिक्षकगण उपस्थित थे।

बैठक में जुलाई से शिक्षण की कार्ययोजना और रणनीतियों विशेष चर्चा किया गया। प्राचार्य ने धाराप्रवाह बातचीत में कई कहानियां, उनके अनुभव और प्रयोग सुनने को मिले। निश्चित रूप से सर की एक – एक बातें अनुकरणीय है। उनकी बातें काल्पनिक हाइपोथेसिस नहीं हैं, बल्कि अनुभवों से सिद्धांत का रूप ले चुका है। और हम उसका प्रयोग करके परिणाम प्राप्त कर सकते है। किस प्रकार निपुण तालिका भरे। कैसे हम कक्षा कक्ष में आए हर बच्चे को आनंददायक पाठ पढ़ाए। कि वो रटे नहीं समझे। हम उनसे कम से कम की उम्मीद करके नहीं बैठे। हम उनसे ऐसी उपलब्धियों को प्राप्त कर सकते है जिनकी हमने उम्मीद नहीं की होगी। सकारात्मक विचारों से उठाए हर कदम हमें उपलब्धियों के रूप में मिलते हैं।हम जिनकी उम्मीद भी नहीं कर सकते, बच्चों में वह सभी संभावनाएं मौजूद है। बच्चों में जो दक्षताएं है जो वो पहले दिन से ही लेकर आए हैं पहचानना होगा। स्कूल का ऐसा आनंद दीजिए की वह प्रतिदिन आए और उनके घर के अभिभावक स्वयं हमारे यहां के शिक्षण से प्रभावित होकर उन्हें भेजे। उन्हें कोई भी घरेलू कार्य स्कूल आने से न रोक पाए।हमारी अच्छी पढ़ाई का सूचकांक हमारी उपस्थिति प्रतिशत के रुप में प्रदर्शित होना चाहिए। बच्चों की प्रार्थना सभा में एक कहानी सुनाई जाए,उसे कम से कम पांच बच्चों से सुने। ताकि वह अपनी भाषा में सुनाए।

प्रार्थना सभा में विभिन्न कार्यक्रम जैसे कविता पाठ (हिंदी, इंग्लिश), श्लोक, सुभाषितानि, आज का विचार , समाचार, गीत, कहानी, कुछ भी  करवाए बच्चों को अवसर दे। प्राचार्य ने टीचिंग लर्निंग मटेरियल (सहायक शिक्षण सामग्री) का भी अवलोकन किया और अति महत्वपूर्ण ये बात बताई कि आप कितनी भी सुन्दर सामग्री बना ले। उसकी उपयोगिता बच्चों को सीखने के लिए होनी चाहिए। आप अगर उससे कुछ बेहतर सीखा पा रहे है तभी वह सार्थक है। इसलिए जब भी हम कुछ शिक्षण सहायक सामग्री बनाए वह अपने ऑब्जेक्टिव्स उद्देश्यों के साथ रहे , हर विषयों पर बने । तभी हम इन सामग्रियों का इस्तेमाल करके जटिल विषयों, अमूर्त विषयों को समझा सकते। अध्यापक अपने टीचिंग विडियोज बनाए और उसे डायट के टेलीग्राम ग्रुप में साझा करे। अध्यापको के टीचिंग विडियोज देखकर सभी को कोई न कोई तरीका सूझता है। जिसे फिर वह प्रदर्शित करता है। और इस तरह से एक ही प्रकरण पर अनेक तरीके मिल जाते है।।ब्लॉक चिरईगांव निश्चित रूप से सर के आगमन से लाभान्वित हुआ है। प्राचार्य सर के ऊर्जावान भाषण से पूरा ब्लॉक बच्चों की विशेष उपलब्धियों के साथ परिणाम देगा ऐसा हम सभी वादा करते है।

अंत में खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती प्रीति सिंह ने डायट प्राचार्य का प्रेरणादाई बैठक के लिए धन्यवाद ज्ञापन किया।

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