
वाराणसी।आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा को असि स्थित जगन्नाथ मंदिर से मनफेर के लिए निकले भगवान जगन्नाथ तीन दिवसीय रथयात्रा मेला के उपरांत सोमवार की भोर में असि स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंचे।
रथ यात्रा मेले के अन्तिम दिन रविवार को भोर में 3:00 बजे तक श्रद्धालुओं को दर्शन देने के उपरांत आरती कर भगवान का पट बंद कर दिया गया।
उसके बाद पूरे रथ यात्रा क्षेत्र की बिजली को काटकर घुप अंधेरे (ब्लैक आउट) कर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं बहन सुभद्रा को चार पहिया वाहन में बैठाकर, सुरक्षा व्यवस्था के साथ असि स्थित जगन्नाथ मंदिर लाया गया।
जगन्नाथ मंदिर पहुंचने पर भी क्षेत्र की लाइट काट दी गई यहां पर भी भगवान घुप अंधेरे (ब्लैकआउट) में मंदिर में पहुंचे और पुजारी राधे श्याम पांडे अंधेरे के बीच तीनों विग्रहों को गर्भगृह में स्थापित किया। पुजारी राधेश्याम पांडे ने बताया कि 225 साल से इसी तरह की परंपरा चली आ रही है कि रथ यात्रा मेले के अंतिम दिन 3 बजे भगवान का आरती होता है इसके पश्चात मंदिर का पट बंद करके पूरे क्षेत्र की लाइट काटकर अंधेरे में असि से जगन्नाथ मंदिर लाया जाता है और यहां भी क्षेत्र में क्षेत्र की बिजली काट कर वह अंधेरे में भगवान को गर्भगृह में स्थापित किया जाता है।
*पंचमुखी हनुमान जी मांगी जाती है अनुमति*
वहीं समाजसेवी रामयश मिश्र ने रथ यात्रा मेले की एक और रोचक जानकारी देते हुए बताया कि जब भगवान डोली में बैठकर बेनी राम बाग पहुंचते हैं तो उनका पूजन आरती करने के पश्चात बेनी राम में स्थित पंचमुखी हनुमान जी की आरती की जाती है और उनसे रथयात्रा मेले की अनुमति ली जाती है। तीन दिवसीय रथयात्रा मेला 3 बजे भोर में भगवान जगन्नाथ की आरती करने के पश्चात फिर पंचमुखी हनुमान जी की आरती कर उनसे भगवान को पुनः जगन्नाथ मंदिर ले जाने की अनुमति मांगी जाती है।
225 साल से ये प्राचीन परंपरा चली आ रही है । साथी तीन दिवसीय रथ यात्रा मेले में भगवान जगन्नाथ की जितने बार भोग व आरती होती है उतने बार ही पंचमुखी हनुमान जी को भी भोग और आरती होती है ।इस अवसर पर ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के सचिव शैलेश त्रिपाठी, न्यासी सुमित राय, उत्कर्ष श्रीवास्तव, आयोजन समिति के रामयश मिश्र, आशु त्रिपाठी, हिमांशु राय, दिलीप मिश्रा, यज्ञ नारायण मिश्रा, हरीश वालिया, वरदान वलिया, शाहिद श्रद्धालु उपस्थित थे।
