धान की फसल में यूरिया का प्रयोग दो बार टॉप ड्रेसिंग के रूप में किया जा चुका है, सलाह-कि अब यूरिया का प्रयोग कदापि न करें

 

वाराणसी। जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह ने किसान भाइयों को अवगत कराया है कि विगत 10 वर्षों के बाद वर्तमान अगस्त माह में अब तक औसत वर्षा 333.10 मिली मीटर हुई है, जो की धान की फसल के लिए बहुत ही अच्छा संदेश है। वर्षा अच्छी होने से पूरे जनपद की धान की फसल बहुत अच्छी है। इसमें किसान भाइयों को सजग रहने की भी जरूरत है सभी किसान भाई अपनी फसल की सतह निगरानी रखें। फसल की वानस्पतिक वृद्धि अच्छी होने के कारण अब उसमें कीट रोग की संभावना बढ़ सकती है, जिन किसान भाइयों के द्वारा धान की फसल में यूरिया का प्रयोग दो बार टॉप ड्रेसिंग के रूप में किया जा चुका है उन्हें सलाह दी है कि अब यूरिया का प्रयोग कदापि न करें। आवश्यकता से अधिक यूरिया उर्वरक का प्रयोग करने से फसल की वानस्पतिक वृद्धि ज्यादा हो जाती है तथा फसल के तने एवं पत्तियां मुलायम हो जाते हैं जिसके कारण कीट एवं रोग का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। इसलिए सभी किसान भाइयों से अपील है कि अनावश्यक रूप से यूरिया उर्वरक का छिड़काव कदापि न करे।

उन्होंने बताया कि जिन किसान भाइयों के द्वारा सब्जी की फसल फूलगोभी, बैगन, मिर्च, टमाटर एवं कद्दू वर्गीय फसलों में खीरा, लौकी, नेनुआ, कद्दू और करेला की खेती की गई है। वह सभी लोग अपने खेत की सतत् निगरानी रखते रहे खेत में आवश्यकता से अधिक पानी होने पर उसको उसके जल निकास की व्यवस्था तत्काल करें साथ ही जिन किसान भाइयों के द्वारा अभी गोभी, बैंगन, मिर्च, टमाटर आदि की अभी नर्सरी डाली गई है उसमें तना सड़न (डैंपिंग ऑफ) रोग लगने की ज्यादा संभावना रहेगी इसके लिए किसान भाई अपनी फसल पर फफूंद नाशी का छिड़काव करे। साथ ही अवगत कराना है कि जनपद के सभी क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरक मुख्य रूप से यूरिया की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है किसान भाइयों से पुनः अपील है कि अपनी आवश्यकता के अनुसार पोस मशीन से अंगूठा लगाकर उर्वरक का क्रय करें आवश्यकता से अधिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी एवं पर्यावरण के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है साथ ही साथ खेती की लागत में भी वृद्धि होती है।

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