
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद की जन्मभूमि लमही स्थित प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक कार्यक्रम “सुनो मैं प्रेमचंद” का 1903वां दिवस उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि ‘समस्या’ केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस समाज की समस्या है जहाँ संवाद की कमी होती है। उन्होंने कहा कि यह कहानी बड़ी सामाजिक क्रांति की बात नहीं करती, बल्कि अंतर्मन की क्रांति और मानवीय स्वभाव के सूक्ष्म पहलुओं को सामने लाती है। कहानी पाठ धीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने किया। डॉ. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि समाज प्रेम को नहीं, बल्कि नियमों और दीवारों को प्रधानता देता है। संतोष कुमार प्रीत ने कहा कि मानवता किसी भी संगठित धर्म से बड़ी है। संचालन आयुषी दूबे, स्वागत मनोज विश्वकर्मा ने किया। इस अवसर पर अनेक साहित्यप्रेमी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
