वाराणसी। कार्डियाबकान सोसाइटी द्वारा आयोजित “कार्डियाबकॉन् – 2025” का भव्य आयोजन झारखंड की राजधानी रांची में संपन्न हुआ। पिछले 14 वर्षों से यह राष्ट्रीय सम्मेलन देशभर में कार्डियोलॉजी, डायबिटीज एवं रीनल (गुर्दा) विज्ञान के एकीकरण तथा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अद्वितीय मंच प्रदान कर रहा है। इस वर्ष चौथे संस्करण में लगभग 150 प्रतिष्ठित चिकित्सकों, रिसर्चर्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह सम्मेलन खासतौर से सीमित संसाधनों के वातावरण में वैज्ञानिक नवाचार एवं मरीजों के हित के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सम्मेलन में डॉ. आशुतोष मिश्रा ने “बायोमार्कर्स और गट माइक्रोबायोटा की भविष्य की सटीक भूमिका” विषय पर विशेषज्ञ प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि कैसे नूतन बायोमार्कर और गट माइक्रोबायोटा डायबिटीज़ की जाँच, रोकथाम और व्यक्तिगत इलाज के भविष्य को बदल सकते हैं, विशेषकर जब संसाधन सीमित हैं। उनकी यह विषयवस्तु उपस्थित चिकित्सकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रही और इससे डायबिटीज के उपचार में क्रांतिकारी परिवर्तन की संभावनाएँ रांची सहित झारखंड राज्य व पूर्वी भारत में दिखाई पड़ी हैं। डॉ. आशुतोष मिश्रा ने सेक्रेटरी स्पीच के रूप में सभी डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा की निरंतर पहल, वैज्ञानिक शोध को प्रोत्साहित करने, और चिकित्सा जगत को जोड़ने के मिशन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों का सम्मानित किया गया एवं मेडिकल फील्ड में उत्कृष्ट नवाचार के लिए अस्पतालों एवं संस्थाओं को सराहा गया। यह आयोजन न केवल चिकित्सकों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में रिसर्च व नवीनतम उपचार पद्धतियों को आमजन तक पहुँचाने का सामूहिक संकल्प भी दोहराया गया। ऐसे सम्मेलनों के माध्यम से देश का चिकित्सा जगत एकजुट हो रहा है और भारत के बेहतर स्वास्थ्य भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है।

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