
वाराणसी। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही स्थित प्रेमचंद स्मारक पर प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 1658वें दिवस पर समाजसेवी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘सेवा मार्ग’ का पाठ किया। सम्मान ट्रस्ट के संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद, प्रकाश कुमार श्रीवास्तव, निदेशक राजीव गोंड तथा राज इंग्लिश स्कूल के चेयरमैन डॉ. हरिओम सिंह ने किया। प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि हिंदी साहित्य के इतिहास में सामाजिक यथार्थ और मानवीय मूल्यों की चर्चा हो तो प्रेमचंद का नाम महान कथाकार के रूप में अग्रणी रूप से लिया जाता है। उनकी कहानियों में आम आदमी के जीवन-संघर्ष, सामाजिक विसंगतियाँ और आदर्श जीवन की प्रेरणा प्रमुख रूप से दिखाई देती है। ‘सेवा मार्ग’ जैसी कहानियाँ सेवा, परोपकार और त्याग को जीवन का सर्वोच्च धर्म मानती हैं। विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार प्रीत ने कहा कि आज के भौतिकवादी और उपभोक्तावादी दौर में ‘सेवा मार्ग’ हमें यह सोचने पर विवश करती है कि क्या समाज केवल स्वार्थ और लाभ पर ही चल सकता है। मानवीय मूल्यों का पुनः स्थापन सेवा-भाव के बिना संभव नहीं है। कार्यक्रम में रामनरेश पाल, सर्वेंद्र, मनोज विश्वकर्मा, राहुल विश्वकर्मा, आनंद कृष्ण ‘मासूम’, सूर्यदीप कुशवाहा, प्रेमानंद सिंह, विनय कुमार सिंह, ओमप्रकाश उपाध्याय, डी.बी. सिंह, प्रमोद कुमार, विपनेश सिंह, सुरेश चंद्र दूबे मौजूद रहे।
