
शिक्षक दिवस पर विशेष
वाराणसी।5 सितम्बर, शिक्षक दिवस, के रूप में मनाया जाता है।भारतीय शिक्षा-जगत् के लिए केवल एक स्मरण-दिवस नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मनवीनीकरण का अवसर है। यह दिवस हमारे पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक, शिक्षक और भारतरत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर मनाया जाता है। उन्होंने अपने जीवन से यह प्रतिपादित किया कि शिक्षक केवल ज्ञान का संचारक नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र का मार्गदर्शक होता है। इस दिन हम उन सभी अध्यापकों को स्मरण करते हैं, जिनके श्रम, समर्पण और संस्कार से पीढ़ियाँ संस्कारित होती हैं और राष्ट्र की धारा गढ़ी जाती है।
उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने आज शिक्षक दिवस के पूर्व संध्या पर रोटरी क्लब के द्वारा आयोजित शिक्षक दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किया।
भारतीय दृष्टि में शिक्षा और शिक्षक,भारतीय संस्कृति में शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन या जीविकोपार्जन का साधन नहीं माना गया। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है जीवन का परिष्कार, संस्कारों का संवर्धन और आत्मा का उत्थान। उपनिषदों में कहा गया है “आचार्य देवो भव।” आचार्य को देवतुल्य माना गया क्योंकि वही शिष्य के भीतर छिपे सत्य और शक्ति को उद्घाटित करता है। गीता कहती है “विद्या विनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि।” शिक्षा केवल जानकारी नहीं, बल्कि विनम्रता और चरित्र का निर्माण है। यही कार्य शिक्षक करता है।
आज जब हम 21वीं सदी की चुनौतियों से जूझ रहे हैं वैश्वीकरण, तकनीकी क्रांति, पर्यावरण संकट, मूल्यहीनता तब शिक्षा को नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय शिक्षानीति 2020 (NEP 2020) हमारे सामने एक दूरदर्शी और परिवर्तनकारी दस्तावेज़ के रूप में प्रकट हुई है। यह नीति केवल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं करती, बल्कि शिक्षा के उद्देश्य, स्वरूप और पद्धति, तीनों में मौलिक परिवर्तन का संकेत देती है।
मातृभाषा और भारतीय भाषाओं पर विशेष बल,21वीं सदी के जीवन-कौशल,अनुसंधान और नवोन्मेष की संस्कृति मूल्यनिष्ठ और बहुआयामी शिक्षा,तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप योग्यता,इन सभी का संतुलित समन्वय किया गया है।
अब प्रश्न यह है कि इन आदर्शों और लक्ष्यों को व्यवहार में कौन उतारेगा? इसका उत्तर है—अध्यापक।नीति और जीवन के बीच सेतु,किसी भी नीति की सफलता इस पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले कितने प्रतिबद्ध हैं। शिक्षक ही वह सेतु है जो नीति के सिद्धांतों को विद्यार्थियों के जीवन में मूर्त रूप देता है।ज्ञानार्जन सूचना-युग में सरल है, किन्तु चरित्र-निर्माण कठिन है। एनईपी 2020 के पीछे यही भावना है कि शिक्षा केवल जानकारी नहीं, बल्कि व्यक्ति को ‘सम्पूर्ण मानव’ बनाने की प्रक्रिया है। यह दायित्व केवल अध्यापक निभा सकता है।नवोन्मेष और जिज्ञासा का पोषण,एनईपी 2020 का बल ‘रटने’ पर नहीं, बल्कि ‘सीखने और करने’ पर है। अध्यापक को विद्यार्थियों में जिज्ञासा जगानी होगी, उन्हें प्रश्न पूछने, नये प्रयोग करने और शोध की दिशा में अग्रसर करने की प्रेरणा देनी होगी।
एक ओर प्रारम्भिक शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़ा रहे। दूसरी ओर उसे वैश्विक ज्ञान और भाषाओं से भी परिचित कराना है। यह कठिन संतुलन केवल अध्यापक साध सकता है।
आज का युग डिजिटल है। विद्यार्थी मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया से घिरा है। शिक्षक का दायित्व है कि वह उन्हें इन साधनों का संयमित, सार्थक और सृजनात्मक उपयोग करना सिखाए। वह विद्यार्थियों को ‘ज्ञान के उपभोक्ता’ से ‘ज्ञान के सृजक’ बनाने की दिशा में अग्रसर करे।
एनईपी 2020 शिक्षा में भारतीयता, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को भी प्रमुखता देती है। मूल्य केवल पुस्तकों से नहीं उतरते, वे शिक्षक के आचरण और आदर्श से विद्यार्थियों के जीवन में समाहित होते है।
वर्ष 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। उस समय तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का स्वप्न केवल नीतियों या योजनाओं से पूरा नहीं होगा। इसकी आधारशिला कक्षा-कक्षों में रखी जाएगी और उन कक्षाओं की आत्मा है शिक्षक।
शिक्षक वह दीपक है जो स्वयं जलकर दूसरों को आलोकित करता है। वह पीढ़ियों को गढ़ता है और राष्ट्र की दिशा निर्धारित करता है। यदि शिक्षक समर्पित, जागरूक और प्रेरक होगा तो विद्यार्थी प्रखर और जागरूक होंगे; और जब विद्यार्थी प्रखर होंगे, तभी राष्ट्र गौरवशाली बनेगा।
शिक्षक दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अध्यापन को केवल नौकरी नहीं, बल्कि जीवन-मिशन बनाएँगे।
हम विद्यार्थियों को केवल जानकारी नहीं, बल्कि विवेक, संस्कार और आत्मबल देंगे। हम राष्ट्रीय शिक्षानीति 2020 के आदर्शों को धरातल पर उतारने के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करेंगे।
यही शिक्षक दिवस का सच्चा संदेश है। शिक्षक यदि अपने उत्तरदायित्व का बोध रखे और पूरे समर्पण से कार्य करे तो निश्चय ही भारत वर्ष 21वीं सदी में विश्वगुरु के रूप में पुनः प्रतिष्ठित होगा
संचालन पूर्व अध्यक्ष रो चन्द्र शेखर कपूर द्वारा किया गया।
इस विशेष अवसर पर पूर्व अध्यक्ष रो.डा.अजीत सैगल ,कार्यक्रम संयोजिका रो.मीनाक्षी दीक्षित,पूर्व अध्यक्ष रो.डा.अनिल ओहरी,रो.योगेश अग्रवाल उपाध्यक्ष रो.अशरफ़ अली कोषाध्यक्ष रो.नवीन सेठ रो.आदित्य दुबे रो.इरफ़ान मिर्ज़ा,सहित अन्य क्लब सदस्य उपस्थित थे।
