
पद्म विभूषण, महामहोपाध्याय पं. गोपीनाथ कविराज जी जन्म जयंती 07 को मनाई जाती है और सात के महत्व बताते हुए कहा की सात स्वर, सात ऋषि और सात ही महाद्वीप है

वाराणसी।महापुरुषों के जीवन से हमें जीवन जीने की कला प्राप्त होती है। प्रत्येक समस्या का समाधान मिलता है। कैसे जीवन जीना है, उसका बोध होता है। महापुरूषों के जीवन के अनुभव ऐसे हैं कि उनके विचार जीवन की विपरित परिस्थितयों में भी वे हमें आगे बढ़ने के लिए सदैव प्रेरित करते हैं। पद्म विभूषण, महामहोपाध्याय पं. गोपीनाथ कविराज संस्कृत वांगमय के प्रकांड विद्वान थे। भारतीय दर्शन की पूरी संस्था थे. पं. गोपीनाथ कविराज, महामहोपाध्याय के ज्ञान का थाह आसान नहीं था. विश्वविद्यालय में तंत्रागत विभाग की स्थापना उन्होंने ही की थी। महान दार्शनिक केवल तंत्रशास्त्र ही नहीं बल्कि वेद-वेदांग, न्याय, सांख्य-योग, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, दर्शन सहित तमाम शास्त्रों के भी ज्ञाता थे। उन्हें चलता-फिरता विश्वकोश माना जाता था। वह भारतीय दर्शन की एक शाखा नहीं पूरी संस्था थे।
उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर स्थित योग साधना के संवाद कक्ष में रविवार को आयोजित पं. गोपीनाथ कविराज की 139वीं जयंती पर विश्वविद्यालय के वेदांत विभाग के आचार्य प्रो.सुधाकर मिश्र ने बतौर अध्यक्ष एवं मुख्य वक्ता के रूप में अपना विचार व्यक्त किया।
ऐसे महापुरुषों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर वृत्तचित्र बनाया जाए तथा समय समय पर सेमिनार, संगोष्ठी आदि कर उनको याद करते रहने से नवीन पीढ़ियों को जानकारी देकर प्रेरणा मिलेगी. सदैव आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।
उक्त कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि ऋषि सनातन संघ व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बन देवी धाम काशी के पीठाधीस्वर श्री रतन वशिष्ठ जी ने कहा कि पद्म विभूषण, महामहोपाध्याय पं. गोपीनाथ कविराज जी जन्म जयंती 07 को मनाई जाती है और सात के महत्व बताते हुए कहा की सात स्वर, सात ऋषि और सात ही महाद्वीप है।
दुनियां में तंत्र शास्त्र को पहचान दिलाने वाले तथा भारतीय शास्त्रों के अतिरिक्त भी पं. गोपीनाथ कविराज को सूफीवाद व ईसाई रहस्यवाद का भी गहन ज्ञान था। शास्त्र उनके जुबान पर रहता था। भारतीय शास्त्र के अलावा कुरान, बाइबिल पर भी उनकी पकड़ समान रूप से थी। तमाम विदेशी मुस्लिम, इसाई भी उनसे समझने विश्वविद्यालय आते रहते थे। उनके ज्ञान राशि के भंडार का थाह नहीं लगाया जा सकता है।
मंचस्थ अतिथियों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दीप प्रज्वलन मां सरस्वती जी एवं पंडित गोपीनाथ कविराज जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। स्वागत और अभिनंदन मंचस्थ अतिथियों का अंगवस्त्रम एवं माल्यार्पण कर स्वागत और अभिनंदन किया गया। स्वागत एवं संचालन प्रो. राघवेंद्र जी दुबे ने किया।
उपस्थित ज़न- प्रो. रामपूजन पाण्डेय,प्रो.रमेश प्रसाद, प्रो.जितेंद्र कुमार, प्रो.हीरककांति चक्रवर्ती,प्रो.विजय कुमार पांडेय, डॉ. पद्दमाकर मिश्र, डॉ. विशाखा शुक्ला,डॉ. दिव्य चेतन ब्रह्मचारी, छात्र एवं अन्य लोग उपस्थित थे।
