
डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने दी सीपीआर पर लाइव प्रस्तुति
रिपोर्ट विक्की वर्मा

वाराणसी।बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के सभागार में सोमवार को आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण सत्र में राजकीय चिकित्सा अधिकारी, वाराणसी और देश के जाने-माने सीपीआर विशेषज्ञ डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने फैकल्टी सदस्यों, छात्रों और शोधार्थियों को कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की तकनीक पर लाइव प्रस्तुति दी।
उन्होंने ने बताया कि “कार्डियक अरेस्ट में पहले तीन मिनट गोल्डन टाइम होते हैं,” 5 से 7 मिनट तक मस्तिष्क को ऑक्सीजन नहीं मिलने पर मरीज ब्रेन डेथ का शिकार हो सकता है। ऐसे में, यदि समय पर सीपीआर दिया जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।
कोरोना के बाद बढ़े कार्डियक अरेस्ट के मामले
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से कार्डियक अरेस्ट के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा किआजकल व्यायाम, खेलकूद और नृत्य जैसी सामान्य गतिविधियों के दौरान भी लोगों को दिल का दौरा पड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में सीपीआर की जानकारी होना हर नागरिक के लिए बेहद आवश्यक है। सही समय पर सीपीआर देने से मरीज के जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।”
मानव शरीर की डमी पर दिया गया लाइव डेमो
डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने मानव शरीर की डमी पर सीपीआर देने की लाइव प्रस्तुति दी। उन्होंने चरणबद्ध तरीके से सही तकनीक समझाई:
*सबसे पहले मरीज को समतल सतह पर लिटाया जाता है।
*नाक और गले की रुकावट की जांच की जाती है।
*प्राथमिक उपचार देने वाला व्यक्ति घुटनों के बल बैठकर अपने दोनों हाथों की सहायता से छाती के बीचों-बीच प्रति मिनट 100 से 120 बार तेजी से दबाव देता है।
*हर 30 पुश के बाद मुंह पर साफ कपड़ा रखकर दो बार सांस दी जाती है।
*यह प्रक्रिया तब तक जारी रखी जाती है जब तक एंबुलेंस न आ जाए या मरीज को विशेषज्ञ चिकित्सक तक न पहुंचा दिया जाए।
उन्होंने कहा कि सीपीआर के सही उपयोग से रक्त का प्रवाह और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति दोबारा शुरू हो जाती है, जिससे मरीज की जान बचाई जा सकती है।
क्या है सीपीआर, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट?
सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन):
एक आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया, जिसमें सांस या दिल की धड़कन रुक जाने पर विशेष तकनीक से छाती दबाव और कृत्रिम सांस देकर मरीज को जीवनदान दिया जाता है।
जब धमनियों में ब्लॉकेज के कारण दिल तक खून का प्रवाह रुक जाता है। इस स्थिति में दिल की धड़कन बंद नहीं होती।
जब दिल की विद्युत गतिविधि अचानक बंद हो जाती है और दिल की धड़कन रुक जाती है। यह आपात स्थिति होती है और तुरंत सीपीआर व डिफिब्रिलेटर की आवश्यकता होती है।
इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, बीएचयू के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेयी ने डॉ. द्विवेदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा:सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीक आम जनमानस तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है। डॉ. द्विवेदी का यह अभियान समाज के लिए अमूल्य योगदान है।”
क्षेत्रीय प्रबंधक, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम, वाराणसी श्री परशुराम पांडेय ने भी डॉ. द्विवेदी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सीपीआर जीवनरक्षक तकनीक है, जिसे हर व्यक्ति को सीखना चाहिए। डॉ. द्विवेदी की निस्वार्थ सेवा समाज के लिए प्रेरणादायक है।”
इस अवसर पर इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेयी, डीन प्रोफेसर सुजीत दूबे, प्रोफेसर अनिंदिता एवं फैकल्टी मेंबर्स, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी मौजूद रहे।
