
काशी से कन्याकुमारी पुस्तक का लोकार्पण
वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही एवं राजकीय जिला पुस्तकालय अर्दली बाजार के संयुक्त तत्वावधान में पुस्तक काशी से कन्याकुमारी का विमोचन व परिचर्चा आयोजित हुआ। लेखक एस.पी. श्रीवास्तव ने उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस पुस्तक में भारत की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया है। मुख्य वक्ता डाक्टर राम सुधार सिंह ने कहा कि काशी से कन्याकुमारी केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की उत्तर से दक्षिण तक की एकता और अखंडता का दस्तावेज़ है। मुख्य अतिथि चन्द्र भाल सुकुमार ने लेखक की गहन दृष्टि और कृति की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर का कार्य करेगी। ओमधीरज ने कहा कि भारतीय यात्रा साहित्य में राहुल सांकृत्यायन, निराला या भवानीप्रसाद मिश्र जैसे लेखकों ने यात्रा और संस्कृति को लोकजीवन से जोड़ा। उनकी तुलना में यह पुस्तक अधिक आध्यात्मिक और शास्त्रीय लगती है। इसलिए इसका दायरा संकीर्ण प्रतीत होता है। सोच-विचार पत्रिका के संपादक नरेन्द्र मिश्र ने कहा कि आज का भारत केवल धार्मिक धारा से नहीं चलता; यहाँ सामाजिक न्याय, विज्ञान, आधुनिकता और लोकतंत्र की बहसें भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। इस दृष्टि से पुस्तक का संदेश अधूरा है। फिर भी यह सांस्कृतिक एकात्मता का दस्तावेज़ होने के कारण वर्तमान समय में भी उपयोगी है। सूर्यदीप कुशवाहा ने कहा कि सार्थक ढंग से उत्तर से दक्षिण की कड़ी प्रस्तुत की गई है, परंतु आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक आयामों पर अपेक्षाकृत कम प्रकाश डाला गया है। पुस्तक में व्यक्तिगत अनुभवों का पुट है, परंतु यह अधिक वृत्तांतात्मक है । प्रो श्रद्धानंद ने अध्यक्षीय वक्तव्य में “काशी से कन्याकुमारी” पुस्तक भारतीय संस्कृति, इतिहास और तीर्थ-परंपरा को उत्तर से दक्षिण तक जोड़ने का प्रयास है। लेखक ने इसे मात्र एक यात्रा-वृत्तांत के रूप में नहीं लिखा, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता के दस्तावेज़ के रूप में प्रस्तुत किया है। आलोचक की दृष्टि से यह पुस्तक भारतीय मानस को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत तो है, किंतु कुछ सीमाओं और चुनौतियों के साथ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अशोक सिंह, गिरीश गिरीश पांडे, दिनेश दत्त पाठक, नंदलाल राजभर, सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध, अवधेश शर्मा, राजेश कुमारश्रीवास्तव, कृष्ण गोपालश्रीवास्तव, संतोष कुमारप्रीत, वैभव वर्मा, और महेंद्र, अनिल कुमार, सतीश चंद, महेंद्र कुमार राय, डॉ समीर श्रीवास्तव, अनुभवश्रीवास्तव, नरेंद्र नाथ मिश्रा, चौहान, शुभम दूबे, वर्षागुप्ता, विजय चंद्र तिवारी, देवेंद्र पांडेय आदि थे। संचालन आयुषी दूबे, धन्यवाद ज्ञापित कंचन सिंह परिहार ने किया गया। सभी का स्वागत निदेशक राजीव गोंड ने किया।
