वाराणसी।शिक्षक दिवस के अवसर पर, हम अपने सम्मानित आचार्यों का अभिनन्दन करते हैं जिन्होंने अपनी सारस्वत साधना से समाज को आलौकिक किया है। हमारी भारतीय परम्परा में कृतज्ञता और श्रद्धा को मानवीय प्रकृति के दो पवित्र पहलू माना गया है। आचार्यों ने अपनी लम्बी साधना से राष्ट्र निर्माण में महती भूमिका निभाई है और अपने सारस्वत साधना से सैंकड़ो विद्यार्थियों को तैयार करके उनके दिलों में अपने लिए श्रद्धा का स्थान बनाया है।

उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने शिक्षक दिवस के स्मृति में मंगलवार को इस वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले पांच आचार्यों तथा पूर्व में सेवानिवृत्त पांच आचार्यों का माल्यार्पण , तिलक,स्मृतिचिह्न, अंगवस्त्र देकर स्वागत और अभिनन्दन किया ।

कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि

आचार्य यास्क के अनुसार, “आचार्य वह है जो अच्छे आचरण या व्यवहार सिखाता है” (आचारं ग्राहयति)। शिक्षक छात्रों को नैतिक और अनुशासित आचरण की शिक्षा देते हैं और उनके चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शिक्षकों का सम्मान करना हमारी पवित्र परम्परा का हिस्सा है। हमें अपने आचार्यों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा का भाव रखना चाहिए जिन्होंने अपनी सारस्वत साधना से समाज को आलौकिक किया है। आचार्यों ने अपने जीवन को ज्ञान के प्रसार और छात्रों के भविष्य को आकार देने में समर्पित किया है।

सेव निवृत्त आचार्य प्रो हरिशंकर पाण्डेय,प्रो हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो कमलकांत त्रिपाठी, प्रो सदानंद त्रिपाठी आदि सेवानिवृत आचार्यों ने अपने विचार व्यक्त किया।

इस अवसर पर वाचिक स्वागत और अभिनन्दन प्रो जितेन्द्र कुमार ने किया।

ज्योतिष शास्त्र के विभागाध्यक्ष एवं वेद वेदाग संकाय प्रमुख प्रो अमित कुमार शुक्ल के संयोजकत्व में संचालन किया।

कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने यहां के सेवानिवृत्त होने वाले प्रो हरिशंकर पाण्डेय,प्रो कमलकांत त्रिपाठी, प्रो हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो सदानंद शुक्ल ,आदि आचार्यों का माल्यार्पण, तिलक, अंगवस्त्र एवं रजतयुक्त स्मृतिचिह्न देकर स्वागत और अभिनन्दन किया।

कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने ऐशप्रो (Aisshpro) ज्वेलर्स का विश्वविद्यालय में जलदान के अन्तर्गत दो बड़े आरो प्लांट दान में देने तथा सदैव इस संस्था के सहयोग में समर्पित होने पर प्रबन्धक रवि चौबे,आशीष पाण्डेय एवं अन्य का स्वागत और अभिनन्दन किया।

उस दौरान कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने यहां से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों में नित्यानंद मिश्र, उमेश दुबे एवं प्रहलाद यादव का माल्यार्पण, तिलक और स्मृतिचिह्न देकर स्वागत और अभिनन्दन किया।

डॉ विजय कुमार शर्मा ने वैदिक एवं प्रो राघवेन्द्र जी दुबे ने पौराणिक मंगलाचरण किया गया।मंचासिन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती, डॉ राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। प्रो रामपूजन पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

उपस्थित जन प्रो रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो जितेन्द्र कुमार,प्रो सुधाकर मिश्र,प्रो हीरक कांत चक्रवर्ती, प्रो रमेश प्रसाद, प्रो महेन्द्र पांडेय, प्रो राघवेन्द्र जी दुबे,प्रो शैलेश कुमार मिश्र, प्रो विजय पाण्डेय,प्रो दिनेश कुमार गर्ग, डॉ उमापति उपाध्याय, डॉ विजेन्द्र कुमार, डॉ ज्ञानेन्द्र सांपकोटा, डॉ विजय कुमार शर्मा, डॉ विल्वेश कुप्पा , डॉ कुंजबिहारी द्विवेदी, डॉ नितिन आर्य, सुशील कुमार तिवारी, शिरीष कुमार सिंह, प्रदीप पांडेय आदि उपस्थित थे।

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