
वाराणसी। रामघाट स्थित सांगवेद विद्यालय में बुधवार को गोवा के श्री गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ संस्थान के अधिपति पूज्यपाद 1008 विद्याधीश तीर्थ स्वामी जी महाराज का पदार्पण हुआ। विद्यालय के द्वार पर वेद मंत्रों से पूर्ण कुंभ प्रदान कर स्वामी जी का स्वागत किया गया। स्वामी जी के आसन ग्रहण के पश्चात पं गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ जी ने काशी में स्वामी जी के चातुर्मास्य प्रसंग का वर्णन किया।
विद्यालय के अध्यक्ष विश्वेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने विद्यालय की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की गतिविधि का वर्णन किया। स्वागत भाषण के पश्चात विद्यालय अध्यक्ष महोदय ने स्वामी जी को माल्यार्पण किया। इसके पश्चात स्वामी जी को फल फूल के साथ अभिनंदन पत्र विद्यालय की ओर से समर्पित किया गया।
काशी के विद्वत समाज की ओर से पं दिनेश जोशी जी तथा काशी के नागरिकों की ओर से श्री चक्रवर्ती विजय नावड जी ने स्वामी जी का अभिनंदन किया एवं उनके पदार्पण पर कृतज्ञता व्यक्त की।
इस अवसर पर स्वामी जी के साथ पधारे विद्वानों का विद्यालय की ओर से सम्मान किया गया ।
स्वामी जी ने अपने आशीर्वचन में विद्यालय के कार्यों का महत्व बदलते हुए कैलाशवासी पद्मभूषण पं राज श्री राजेश्वर शास्त्री द्रविड़ जी की वेद निष्ठा एवं धर्म निष्ठा की चर्चा की और कहा कि पवित्र विद्यालय में पधारने से चातुर्मास्य के बाद किए जाने वाले सीमोल्लंघन का कार्य पूर्ण हुआ। विद्यालय पूर्व परंपरा अनुसार निरंतर चलता रहे यह हमारा शुभाषिर्वाद है ।स्वामी जी ने विद्यालय के कार्य के लिए विशुद्ध संस्कृत विद्या मंदिर संरक्षण कोष में द्रव्य राशि प्रदान की।
इस अवसर पर विद्यालय के अध्यापकों एवं विद्वानों का स्वामी जी ने सत्कार किया। उपस्थित सभी लोगों को प्रसाद वितरण के पश्चात स्वामी जी ने विद्यालय के लक्ष्मण पुस्तकालय ,अन्न क्षेत्र तथा छात्रावास का अवलोकन किया। धन्यवाद ज्ञापन पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ जी ने किया ।
