ज़िन्दगी के रंग,इन दीयों के संग

 

वाराणसी।कितने मनोयोग से,कितनी तल्लीनता से ये बौद्धिक दिव्यांग बच्चे, कोई एक हाथ से तो कोई दोनों हाथों से दीयों को कलर डिजाइन करने में मग्न, क्यों कि इन बच्चों का लक्ष्य है दीपावली, दीपावली पर अपनी कमाई से किसी को पटाखे फुलझड़ी लेनी है तो किसी को मनपसंद मिठाई।

स्वालंबन पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष राधा सिंह का कहना है कि बहुत कोशिश कर रही हूं, इन जैसे बहुत से बच्चों के सपने पूरे करने की, हौसला और हुनर तो बहुत है पर संघर्ष कहीं ज्यादा है।

इन बच्चों के कार्य सम्बंधित संसाधन जुटाने में अकेले अब टूटने लगी हूं, पर इन बच्चों की पुकार और उम्मीद जो इन्हें मुझसे है मुझे थक कर गिरने नहीं देती,बार बार उठ खड़ी होती हूं। इन बौद्धिक दिव्यांग बच्चों की इक छोटी सी उम्मीद बन कर कि अभी बहुत से बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इनके सपनों को साकार करना है।

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