
पंडित मुरारी लाल शर्मा यंत्रालय सहित कई विभागों का हुआ अवलोकन

शास्त्रार्थ परम्परा: शास्त्रों के संरक्षण और संवर्धन का माध्यम:- कुलाधिपति
वाराणसी।शास्त्रार्थ परम्परा शास्त्रों के संरक्षण और संवर्धन का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके माध्यम से शास्त्रों के अमृत तत्वों का प्रवाह होता है और शास्त्रों की गहराई और विस्तार को समझने का अवसर मिलता है। शास्त्रार्थ का प्रचार-प्रसार दूर तक होना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग शास्त्रों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें और शास्त्रों की महत्ता को समझ सकें।
उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार को विश्वविद्यालय के पुरातत्व संग्रहालय, पाणिनि भवन सभागार, परीक्षा भवन, ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केन्द्र, पांडुलिपि संरक्षण केन्द्र, प्रकाशन संस्थान, विक्रय विभाग एवं केन्द्रीय कार्यालय का कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा के साथ सूक्ष्मता से निरीक्षण कर व्यक्त किया।
कुलाधिपति एवं श्री राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने पाणिनि भवन के अन्दर चल रही व्याकरण की कक्षा में जाकर विद्यार्थियों के साथ सूक्ष्मता से व्याकरण के
आचार्य कक्षा में विद्यार्थियों ने लघुशब्देन्दुशेखर ग्रन्थ पर “राम” शब्द पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने संस्कृत भाषा के साथ-साथ हिन्दी में भी अपने विचार प्रस्तुत किए।इस ग्रन्थ के माध्यम से विद्यार्थियों ने शास्त्रीय ज्ञान को परिभाषित किया।
उन्होंने ज्योतिष विभाग निरीक्षण के दौरान परम्परा के अनुसार दरी परपरंपरानुसार बैठे विद्यार्थियों को देखकर प्रसन्नता के साथ लघु पाराशरी ग्रन्थ पढ़ रहे छात्रों से उनके परिचय को प्राप्त कर उक्त ग्रन्थ पर सम्यक जानकारी प्राप्त कर ज्योतिष विषय में कुण्डली, हस्तरेखा आदि विषयों पर भी सम्यक जानकारी लेते हुए ज्योषित में ग्रहों की शान्ति के जो उपाय हैं उनको जानने को निर्देश दिया तथा वहां प्रतिष्ठित पण्डित मुरारी लाल शर्मा यंत्रालय में वहां रखे 18 विभिन्न यंत्रों का सूक्ष्मता से अवलोकन कर अपनी जिज्ञासा भी व्यक्त की जिसके सम्बन्ध में ज्योतिष शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो अमित कुमार शुक्ल ने विस्तार से याम्योत्तर, एस्ट्रोलैब आदि के बारे बताया।
महामहिम कुलाधिपति ने ज्योतिष विभाग का निरीक्षण किया और विद्यार्थियों की प्रगति को समझने का अवसर प्राप्त किया। इस दौरान, उन्होंने अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों से लघु पाराशरी ग्रन्थ पर गहन चर्चा की और ज्योतिष विषय में कुण्डली, हस्तरेखा आदि की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।ज्योतिष विषय में ज्ञान प्राप्त करने और ग्रहों की शान्ति के उपायों को जानने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने विभाग की गतिविधियों और विद्यार्थियों की प्रगति को समझने के साथ-साथ ज्योतिष के प्राचीन और आधुनिक पहलुओं पर भी चर्चा की।
माननीय अतिथि ने पण्डित मुरारी लाल शर्मा यंत्रालय में रखे 18 विभिन्न यंत्रों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया और ज्योतिष शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो अमित कुमार शुक्ल से यंत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर यंत्रों की प्रदर्शनी लगाने भी निर्देश दिया। सभी यंत्रों पर संस्कृत नाम लिखने निर्देश दिया।
उन्होंने पुरातत्व संग्रहालय का भ्रमण किया और संग्रहालयाध्यक्ष से जानकारी प्राप्त की। मुद्रा वीथिका में उन्होंने भारत में मुद्राओं के क्रमिक विकास को देखा। प्रस्तर वीथिका और लघुचित्र वीथिका का भी भ्रमण किया। राज्यपाल महोदया ने संग्रहालय के संग्रह और प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने इसे और अधिक आधुनिक बनाने पर जोर दिया। इस भ्रमण से विश्वविद्यालय की गतिविधियों को समझने का अवसर मिला।
उन्होंने यहां स्थापित ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केन्द्र का निरीक्षण कर यहां चल रहे 13 पाठयक्रमों के बारे में कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा से विस्तार से जानकारी प्राप्त कर संपूर्ण प्रवेश के सम्बन्ध में जानना चाहा साथ ही भारत के अतिरिक्त विदेशों से कितने विद्यार्थियों ने विभिन्न पाठयक्रमों में प्रवेश लिया है।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केन्द्र से प्रदेश के अन्य संस्थाओं को जोड़ने का भी सुझाव दिया। जिसमें नई शिक्षा नीति के क्रेडिट से लाभ प्राप्त होने पर जोर दिया।
उन्होंने यहां के भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के द्वारा सरस्वती भवन में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण केन्द्र में चल रहे संरक्षण कार्यों का सूक्ष्मता से निरीक्षण कर प्रत्येक विंदु को देखते हुए दुर्लभ पांडुलिपियों में संरक्षित ज्ञान तत्वों पर चर्चा किया। संरक्षण के अनुरूपण यन्त्र को देखते हुये ट्रीटमेंट कार्यों को गति देने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने परीक्षा विस्तार भवन,प्रकाशन संस्थान में यहां प्रकाशित ग्रंथों, केन्द्रीय कार्यालय आदि के संग्रह का भी अवलोकन किया।
प्रारम्भ में आगमन के दौरान महामहिम राज्यपाल के दक्षिणी द्वार पर प्रवेश के दौरान कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा एवं कुलसचिव राकेश कुमार ने परंपरानुसार स्वागत और अभिनन्दन किया। कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि महामहिम जी ने संपूर्ण परिसर की स्वच्छता और व्यवस्था तथा शैक्षणिक गतिविधियों पर संतोष जाहिर की। प्रथम बार कुलपति कार्यालय में आकर कार्यालय की वास्तविक स्थिति पर अत्यन्त प्रसन्नता व्यक्त किया साथ ही यहां चल रहे निर्माण कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त किया। महामहिम का आगमन से विश्वविद्यालय गौरव और ऊर्जावान हुआ। उन्होंने यहां वट वृक्ष के रोपण का उम्र जानना चाहा,इस आशय की पट्टिका लगाने का सुझाव भी दिया।
महामहिम के आगमन से पूर्व संपूर्ण परिसर में वेद मंत्रों की ध्वनि से गुंजायमान रहा।
निरीक्षण के दौरान कुलसचिव राकेश कुमार, वित्त अधिकारी हरिशंकर मिश्र, प्रो॰ दिनेश कुमार गर्ग , प्रो अमित कुमार शुक्ल, प्रो रमेश प्रसाद, डॉ दिव्याचेतन ब्रह्मचारी, डॉ मधुसूदन मिश्र, अभियंता रामविजय सिंह,डॉ विमल त्रिपाठी आदि उपस्थित थे।
