वाराणसी।’रंगमंच’ क्लब, वसंत कन्या महाविद्यालय, ने वेलबीइंग सर्विस सेल (WBSC), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित नाट्य प्रतियोगिता में अपनी प्रस्तुति ‘परिचय’ के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता का विषय रहा “नियति का पुनर्लेखन: आशा और हारकर जीतने की कहानी”। कार्यक्रम का आयोजन के.एन. उडुप्पा ऑडिटोरियम, का.हि.वि.वि. में किया गया जिसमें छह अन्य टीमें शामिल रहे।

अदिति तिवारी के नेतृत्व में ‘रंगमंच’ ने अपनी नाट्य प्रस्तुति ‘परिचय’ का मंचन किया जिसकी कहानी छाया नामक एक युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका जीवन उसकी माँ की चार्ली चैपलिन के प्रति गहरी प्रशंसा से अत्यधिक प्रभावित था। संघर्षों से घिरी होने के बावजूद, छाया को चैपलिन में न केवल प्रेरणा मिली, बल्कि वे उसके लिए एक प्रकाशस्तंभ की तरह बन गए, जिन्होंने अपने लचीलेपन, हास्य और अदम्य साहस से जीवन के तूफानों में उसका मार्गदर्शन किया। उनके प्रकाश का अनुसरण करते हुए, उसने अपनी कठिनाइयों को शक्ति में बदल दिया और अंततः साहस और आशा के साथ अपने भाग्य को फिर से लिखा।

‘परिचय’ की तैयारी का सफ़र चुनौतीपूर्ण और प्रेरणादायक दोनों था। टीम के हर सदस्य ने नाटक को जीवंत बनाने के लिए अथक परिश्रम किया। कलाकारों और टीम में अंजलि अलका, श्रीजिता नंदी, शुभलक्ष्मी मिश्रा, निवेदिता राय, रुचिता पंत, सावित्री कुमारी, सोनाली, काजल चौधरी, श्रेया शाही, अदिति तिवारी, अदिति मिश्रा, लतिका बिष्ट, अद्रिका अग्रवाल, प्राची श्रीवास्तव अदिति, रश्मि और दीया मिश्रा शामिल थीं, जिन सभी ने असाधारण समर्पण और टीम वर्क का परिचय दिया। संस्कृति और वैष्णवी राय के प्रयासों से पटकथा को खूबसूरती से तैयार किया गया था।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने छात्राओं की उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हे उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह महाविद्यालय के लिए गर्व का क्षण है।

प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सातों टीमों ने विषय की रचनात्मक व्याख्याएँ प्रस्तुत कीं जिनमें, ‘रंगमंच’ का प्रदर्शन अपनी भावनात्मक गहराई, कलात्मक निष्पादन और जिजीविषा के सशक्त संदेश के लिए विशिष्ट रहा। नाटक को दर्शकों और निर्णायकों की ज़बरदस्त सराहना मिली ।

प्रतियोगिता में मिली यह जीत प्रत्येक प्रतिभागी की कड़ी मेहनत और रचनात्मकता, अदिति तिवारी के कुशल निर्देशन और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की समन्वयक डाॅ. शशिकला एवं डॉ. नैरंजना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन का प्रतीक रहा।

इस अवसर पर डाॅ. सुप्रिया सिंह, डॉ. पूर्णिमा सिंह, डाॅ. सौमिली मंडल और डाॅ. प्रसीद चौधरी उपस्थित थे।

इस उपलब्धि ने टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाया और आशा और परिवर्तन के माध्यम के रूप में रंगमंच में विश्वास की पुष्टि की है, जहाँ ‘परिचय’ जैसी कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि सबसे कठिन समय में भी, प्रकाश की एक किरण हमें अपने भाग्य को फिर से लिखने में मदद कर सकती है।

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